अतिक्रमण हटाने के विरोध में कांग्रेस का ऊधमसिंह नगर कलक्ट्रेट पर धरना

हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने नगला में 60 लोगों को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने की चेतवानी दी है। जबकि लोक निर्माण विभाग ने नगला मार्ग के दोनों ओर अतिक्रमण करने वाले 450 लोगों को नोटिस भेजा है। इससे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा है।

Prashant MishraMon, 21 Jun 2021 01:25 PM (IST)
कांग्रेस के लोगों को यह समझना चाहिए कि यह कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्यवाही की जा रही है।

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) : नगला में अतिक्रमण हटाने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता कलक्ट्रेट पहुंचे तो गेट के अंदर जाने से पुलिस ने रोक दिया। बाद में एडीएम जगदीश चन्द्र कांडपाल ने पहुंचकर समस्या सुनी।कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर रोष जताया। उन्होंने कहा कि गरीबों को उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

हाईकोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने नगला में 60 लोगों को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने की चेतवानी दी है। जबकि लोक निर्माण विभाग ने नगला मार्ग के दोनों ओर अतिक्रमण करने वाले 450 लोगों को नोटिस भेजा है। इससे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा है। कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री तिलकराज बेहड़ ने कार्यकर्ताओं के साथ आज कलक्ट्रेट पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें कलक्ट्रेट परिसर में जाने से गेट पर रोक दिया। इससे आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गेट पर ही धरना प्रदर्शन किया।

बाद में एडीएम कांडपाल व संयुक्त मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा भी गेट पर पहुंचकर समस्या सुनी। बेहड़ ने कहा कि कई साल लोग नगला में बसे हुए हैं। जबकि प्रशासन इन्हें उजाड़ने में लगा है। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। चेताया कि यदि गरीबों को उजाड़ा गया तो उग्र आन्दोल किया जाएगा।धटना प्रदर्शन करने वालों में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष नारायण सिंह बिष्ट, गदरपुर के पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन, कैलाश पांडेय,राजेश,नरेश बिष्ट, कन्हैयालाल, किशन सिंह चौहान, गुड्डू तिवारी, दर्शन कोली, महेंद्र शर्मा, प्रेम आर्या, दानिश आरिफ, धर्मेंद्र सिंह, मनोज सिंह आदि शामिल थे। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण का मामला कोर्ट में था। जिसका अादेश आने के बाद ही पुलिस-प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस के लोगों को यह समझना चाहिए कि यह कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्यवाही की जा रही है। यदि कोर्ट के अादेश का अनुपालन नहीं किया जाएगा तो यह माननीय हाईकोर्ट की अवमानना होगी। इसका विरोध करना है तो प्रशासन के बजाय कानून के तहत बात को कोर्ट में रखें।

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