एकला ही रही कांग्रेस, साथ में सिर्फ आश्वासन

ेगोविंद सनवाल, हल्द्वानी : कांग्रेस का पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि व महंगाई के विरोध में भारत बंद का असर कुमाऊं में भले मिला जुला रहा हो, लेकिन उसके साथ चलने का दावा करने वाले यहां कहीं नजर नहीं आए। राज्य के लिहाज से भाजपा के विरोधियों में बसपा, सपा, यूकेडी व भाकपा माले सहित तमाम दलों की दूरियां बंद से रही। ऐसे में कांग्रेस की मजबूरी एकला चलने में रही और नतीजा यह रहा कि पार्टी जितने बड़े मंसूबे निकल बंदी के सफर पर निकलना चाह रही थी वह सफल नजर आया नहीं। कांग्रेस के 10 सितंबर के भारत बंद को भाजपा छोड़ 19 दलों ने समर्थन का आश्वासन दिया था। सोमवार को परीक्षा की घड़ी थी इसलिए कांग्रेस के क्षत्रपों ने भी राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिहाज से कई दिन पहले से ही इसकी तैयारी कर ली थी। उम्मीद थी कि तमाम भाजपा विरोधी दल साथ खड़े होंगे और जनता के बीच एक बड़ा संदेश कांग्रेस दे सकेगी। बावजूद इसके सोमवार को समर्थन करने वालों की गिनती अंगुलियों में गिनने लायक भी नहीं रही। नैनीताल जिला मुख्यालय में सपा की युवा इकाई युवजन सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सोहेल खान के नेतृत्व में चंद कार्यकर्ताओं ने तल्लीताल डांठ में कांग्रेस के कार्यक्रम से इतर केंद्र का पुतला दहन कार्यक्रम किया। चंपावत में सपा जिलाध्यक्ष ललित भट्ट पांच-सात कार्यकर्ताओं के साथ जरूर कांग्रेसियों के साथ बाजार बंद कराने निकले, लेकिन वहां पहले ही व्यापारी बंद के विरोध में थे, लिहाजा नतीजा सिफर ही रहा। पिथौरागढ़ में भाकपा माले नेता गोविंद कफलिया बंद में शामिल रहे। लालकुआं का बिंदुखत्ता क्षेत्र भाकपा माले का गढ़ है। इसलिए यहां भाकपा के जिला सचिव कैलाश पांडे के नेतृत्व में जूलूस निकाल केंद्र का पुतला दहन कार्यक्रम हुआ, लेकिन यहां कांग्रेस कहीं भी साथ नहीं थी। ऐसे में यह तो स्पष्ट नजर आ ही गया कि कांग्रेस को भले ही मुंहजुबानी डेढ़ दर्जन से अधिक पार्टियों का समर्थन रहा हो, जमीनी हकीकत कुछ और ही थी। कई क्षत्रप अपने ही गढ़ में फेल भारत बंद को लेकर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भले ही एक दिन पूर्व पूरा जोर लगा दिया हो, लेकिन पार्टी के कई क्षत्रप असली परीक्षा की घड़ी में फेल ही नजर आए। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने भले ही नैनीताल शहर में जोरदार रैली का आगाज कराया हो, लेकिन यहां बाजार बंद के नाम पर नतीजा सिफर ही दिखा। सुबह से ही बाजार खुला और बंद होने तक कारोबार रोज की भांति ही चला। यहां विधायक संजीव आर्य भी कुछ बलियानाला प्रभावितों के चलते व्यस्त नजर आए तो कुछ हालात को देख प्रदर्शन तक ही सीमित रहे। रुद्रपुर में पूर्व मंत्री तिलक राज बेहड़ का जादू भी नदारद रहा। अल्मोड़ा में पूर्व विधायक मनोज तिवारी ने जरूर सुबह से कवायद कर पार्टी की लाज कुछ हद तक बचा ली। चम्पावत में बंद से उकताए व्यापारियों ने साफ कर दिया कि लगातार दो दिन दुकान बंद ही रखेंगे तो कारोबार कब करेंगे। पिथौरागढ़ के धारचूला में विधायक हरीश धामी के गृह क्षेत्र बंगापानी व मदकोट में बंद का काफी हद तक असर नजर आया। हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने पूरा जोर लगाया था, लिहाजा कांग्रेस समर्थित व्यापारिक संगठनों के अगुवाओं ने उनकी मेहनत पर पानी नहीं फिरने दिया। इसके अलावा कहीं भी ऐसा नजर नहीं आया कि स्थानीय क्षत्रप अपने गढ़ों को प्रभावी रूप से पेश कर पाए हों।

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