ई-स्टांप व शपथ पत्र के नाम पर लूट, 10 के स्टांप के लिए वसूले जा रहे 25 से 30 रुपये

दैनिक जागरण की पड़ताल में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। जनपद में करीब 40 वेंडरों द्वारा ई स्टांप की बिक्री की जा रही है। यहां पर फिजीकल स्टांप के साथ ही ई-स्टांप पर भी ओवररेटिंग की जा रही है।

Prashant MishraFri, 24 Sep 2021 04:43 PM (IST)
अफसरों की नाक के नीचे हो रही इस लूट से जिम्मेदार आंख मूंदे हुए हैं।

विनय कुमार शर्मा, चम्पावत। अगर आप ई स्टांप खरीदने व किसी कागज की नोटरी कराने जा रहे हैं तो सावधान हो जाईए। कारण कि ई-स्टांप विक्रेता व नोटरी अधिवक्ता प्रशासन की नाक के नीचे खुली लूट कर रहे हैं। ऐसे में आपको बहुत ही सतर्कता बरतने की जरूरत है। कारण कि सरकार ने सभी के लिए दर निर्धारित की है। आपकी अज्ञानता के कारण वह आपसे लूट कर रहे हैं। जिसका आपको पता भी नहीं होता। दैनिक जागरण की पड़ताल में यह बात सामने आई है। 

स्टांप की बिक्री में गड़बड़ी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के साथ ही पारदर्शिता बनी रही, इसके लिए सरकार ने ई-स्टांप की शुरूआत की। ई-स्टांप वेंडर को भी रजिस्टर्ड होने के बाद ही स्टांप सेल करने की परमीशन मिलती है लेकिन शहर में ई-स्टांप पर लूट की खुली छूट है। यह बात दैनिक जागरण की पड़ताल में यह चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। जनपद में करीब 40 वेंडरों द्वारा ई स्टांप की बिक्री की जा रही है। यहां पर फिजीकल स्टांप के साथ ही ई-स्टांप पर भी ओवररेटिंग की जा रही है। यानि 10 रुपए वाला स्टांप 25 से 30 रुपये में बेचा जा रहा है। वो भी तहसील व सीएससी सेंटरों पर। इसके बाद भी जिम्मेदार इसकी अनदेखी कर रहे हैं।

इसलिए शुरू हुए ई-स्टांप

ई-स्टांप व्यवस्था लागू होने से रजिस्ट्री कार्यालय की व्यवस्थाओं में भी बदलाव आया। पहले रजिस्ट्री में जमीन की कीमत के अनुसार कई स्टांप लगते थे। इन स्टांप की लिखावट में कई त्रुटियां होती थी। हर दिन बड़ी संख्या में रजिस्ट्री होने से यहां के कर्मचारियों के लिए इन स्टांप को चेक करना तक मुश्किल होता था। अब ई-स्टांप के जरिए रजिस्ट्री होने से कर्मचारियों के लिए इनको चेक करना आसान है। इससे फर्जीवाड़े में भी काफी हद तक लगाम लगी है।

क्या है ई-स्टॉप बिक्री का नियम

ई-स्टांप बिक्री के लिए शासन ने वेंडरों को लाइसेंस जारी किए हैं। जनपद में करीब 40 वेंडर ई-स्टांप की बिक्री करते हैं। जिनसे प्रतिमाह करीब 25 से 30 लाख की स्टांप की बिक्री होती है। वेंडर को स्टांप की बिक्री के लिए स्टांप की दर का 0.89 प्रतिशत कमीशन तय है। लेकिन वेंडर दस की जगह जनता से 25 से 30 रुपये तक वसूल रहे हैं।

शपथ पत्र के नाम पर होती है जमकर लूट

तहसील में शपथ पत्र, इकरार नामा समेत कई दस्तावेजों की नोटरी कराने के नाम पर जरूरतमंदों की जेब काटी जा रही है। रसोई गैस का आवेदन पत्र भरने के लिए शपथ पत्र बनवाने तथा फार्म भरने हेतु तहसील में आवेदकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। आवेदकों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनका आर्थिक शोषण किया जा रहा है। एक शपथ पत्र बनवाने में डेढ़ सौ से लेकर दो सौ रुपये खर्च हो रहे हैं। फीस को लेकर प्रतिदिन आवेदक और नोटरी अधिवक्ता में नोक-झोंक हो रही है। अफसरों की नाक के नीचे हो रही इस लूट से जिम्मेदार आंख मूंदे हुए हैं। 

नोटरी की दर है निर्धारित

जिला न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि नोटरी के लिए सरकार ने दर निर्धारित की है। जनपद में दस नोटरी अधिवक्ता नामित किए गए हैं। वर्तमान में इनमें दो की मृत्यु हो चुकी है। वह सीट खाली है। नोटरी करने वाला अधिवक्ता प्रैक्टिस करने के साथ कोर्ट में बैठने वाला हो और उसका अपना चैंबर हो। वहीं अधिवक्ता नोटरी कर सकता है। वह दुकान नहीं खोल सकता। नोटरी के लिए दस रुपये का टिकट व 20 रुपये उसकी फीस निर्धारित है। यानि वह एक नोटरी करने के 30 रुपये ले सकता है लेकिन जनपद में एक नोटरी के लिए जनता से सौ से 150 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इसलिए नोटरी बनाते वक्त सतर्कता बरतिए।  

ओवररेटिंग पर होगी कार्रवाई : एडीएम 

एडीएम शिवचरण द्विवेदी ने कहा कि स्टांप व नोटरी के नाम पर हो रही लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ई-स्टांप बिक्री कर रहे वेंडरों, सीएससी सेंटरों के मैनेजरों तथा नोटरी कर रहे अधिवक्ताओं को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह शासन द्वारा तय धनराशि से जनता से पैसे न लें। स्टांप के लिए दस रुपये स्टेशनरी व अन्य खर्च के लिए निर्धारित है। वहीं नोटरी के लिए 30 रुपये। अगर इसके बावजूद भी कोई स्टांप व नोटरी के लिए अतिरिक्त शुल्क वसूलता है तो उसके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने के साथ सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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