ऑनलाइन शिक्षा से जुड़कर UOU ने भी कोरोना योद्धा का कार्य किया : वीसी नेगी

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सहयोग से पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम एडवांसेज ऑफ़ आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग इन सोसाईंटीकल डेवलपमेंट पर सोमवार से शुरू हो गया। कार्यशाला का शुभारम्भ कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने किया।

Prashant MishraMon, 16 Aug 2021 05:56 PM (IST)
हम छात्रों से जुड़ सकते है व ऑनलाइन वीडियो लेक्चर विकसित कर छात्रों तक सीधे पहुँच सकते है।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विद्याशाखा द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सहयोग से पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, एडवांसेज ऑफ़ आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग इन सोसाईंटीकल डेवलपमेंट पर सोमवार से शुरू हो गया। कार्यशाला का शुभारम्भ कुलपति प्रो. ओपीएस नेगी ने किया। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौर में कोरोना योद्धा के रूप में ऑनलाइन शिक्षा से जुड़कर विश्वविद्यालय ने अपने आप को मज़बूत व सक्षम बनाया है। प्रो. नेगी ने  कहा कि वर्चुअल क्लासेज का होना बहुत जरूरी है। हम छात्रों से जुड़ सकते है व ऑनलाइन वीडियो लेक्चर विकसित कर छात्रों तक सीधे पहुँच सकते है। यह उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय का लक्ष्य भी है। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अटल अकादमी, एआईसीटीई के निदेशक प्रो. आरके सोनी ने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के जरिये मानव हस्तक्षेप के बिना काम कर सकेंगे। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा कीऔर कहा कि इसका उद्देश्य आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके मशीन को ट्रेन करना है | कंप्यूटर विज्ञान विद्याशाखा के निदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पन्त के द्वारा आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। प्रो. पंत ने स्पेक्ट्रम ऑफ सोशल सिग्निफिकेंट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग विषय पर अपना व्याख्यान दिया उन्होंने बिग बैंक से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह लगातार इनोवेशन कर रहा है कंप्यूटर मशीन के बीच के फर्क को विस्तार से समझाया है।

उन्होंने बताया की इंडस्ट्री 4.0 में एआई आधारित नई नई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है एलन टयूरिंग की खोज के बाद से होने वाले लगातार डेवलपमेंट के बारे में उन्होंने विस्तार से चर्चा कीI जॉन न्यूमैन के आर्किटेक्चर, डाटा इनफार्मेशन नॉलेज इंटेलिजेंस जैसे विषय को विस्तार से समझायाI उन्होंने स्ट्रांग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा वीक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बीच के अंतर को समझाया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में भी चर्चा कीI उन्होंने बताया कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का उपयोग हेल्थ केयर एग्रीकल्चर, कृषि, पेटर्न आईडेंटिफिकेशन, जिनोमिक ट्रीटमेंट, डायग्नोसिस, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग अन्य क्षेत्रों में किया जा रहा हैI

वॉइस टेक्नोलॉजी में एआई का आज के समय में बहुत अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है|  डॉ अभय सक्सेना देव संस्कृति विश्वविद्यालय ने मशीन लर्निंग इनोवेटिव एंड हॉलिस्टिक अप्रोच विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि टेक्निकल व नॉन टेक्निकल, के बीच के अंतर को समझना बहुत जरूरी है। प्रोफेसर सक्सेना ने सुपरवाइज्ड लर्निंग अनसुपरवाइज्ड लर्निंग इंफोर्समेंट लर्निंग इंटूटिव लर्निंग के अंतर को बताया। ह्यूमन साइकोलॉजी आज एआई के साथ-साथ ह्यूमन साइकोलॉजी को समझना भी बहुत जरूरी है। नए सिस्टम इस तरह से तैयार किए जा रहे हैं की उम्र में सेंटीमेंट को समझने की भी क्षमता हो। वर्चुअल प्राइवेट असिस्टेंट बहुत तेजी से हमें बहुत सारी रोजमर्रा की चीजों में सहायता प्रदान कर रहे हैं और एक तरह हमारे जीवन का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

कार्यशाला में आईआईटी रुड़की के डा. संदीप कुमार द्वारा अपॉर्चुनिटी इन एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग इंडियन पर्सपेक्टिव विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। धन्यवाद प्रस्ताव विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एचएस नयाल व कार्यक्रम का संचालन समन्वयक डा. आशुतोष भट्ट द्वारा  द्वारा किया गया । तकनीकी सत्र विभिन्न रिसोर्स पर्सन के द्वारा आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग का उपयोग करके प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक बालम दफौटी, डा. गोपाल दत्त व एसोसिएट प्रोफेसर डा. जीतेंद्र पांडे सहित बड़ी संख्या प्रतिभागी ऑनलाइन फैकल्टी प्रोग्राम में जुड़े रहे।

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