भाबर से भाजपा साधेगी पहाड़ व मैदान का संतुलन, नमो मैजिक से सियासी माहौल बनाने की कवायद

भाजपा ने हल्द्वानी के अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में पीएम नरेन्द्र मोदी की विजय संकल्प रैली प्रस्तावित कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरान पीएम नई परियोजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं। नेता पहाड़ व भाबर की 20 तथा तराई की नौ सीटों पर निगाहें लगाए हैं।

Prashant MishraWed, 08 Dec 2021 05:47 PM (IST)
पीएम नरेन्द्र मोदी का कुमाऊं की 29 सीटों पर फोकस रहेगा।

गणेश जोशी, हल्द्वानी : भाजपा एक बार फिर मिशन-2022 के लिए उत्तराखंड में नमो मैजिक चलाना चाहती है। इसके लिए सियासी मैदान तैयार होने लगा है। देहरादून में विजय संकल्प रैली के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी का कुमाऊं की 29 सीटों पर फोकस रहेगा। भाजपा भाबर यानी हल्द्वानी से पहाड़ की 20 व मैदान की नौ समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। वैसे भी कुमाऊं का प्रवेश द्वार हल्द्वानी ऐसा शहर है जहां पर्वतीय जिलों के लगभग सभी गांव व शहर के लोग यहां आकर बसे हैं। 

विधानसभा चुनाव-2022 के लिए अब समय बहुत कम है। ऐसे में सभी दल कोशिश में हैं रैली, सभा व बैठकों के जरिये सियासी माहौल अपने पक्ष में कर लिया जाए। राज्य में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के साथ ही सत्तारूढ़ भाजपा भी हरसंभव ताबड़तोड़ तैयारियों में जुटी है। भाजपा के पास नमो मैजिक बड़ा चुनावी हथियार है। इसी हथियार ने पिछले चुनाव में पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाया था। पार्टी एक बार फिर 2022 के लिए राज्य में वही पुराना माहौल दोहराना चाहती है। इसलिए विषम भौगोलिक परिस्थिति वाले राज्य में अलग-अलग तरीके से समीकरण साधना बड़ी चुनौती है।

चार दिसंबर को गढ़वाल क्षेत्र के देहरादून से पीएम नरेन्द्र मोदी की विजय संकल्प रैली से उत्साहित पार्टी नेता अब पहाड़ व भाबर की 20 तथा तराई की नौ सीटों पर निगाहें लगाए हुए हैं। एंटी इन्कंबेंसी हो या फिर तीन मुख्यमंत्री बदलने का मामला। या फिर अभी तक कई बहुप्रतिक्षित परियोजनाओं के शुरू न होना। इन सब मसलों की काट के लिए भाजपा ने हल्द्वानी के अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में पीएम नरेन्द्र मोदी की विजय संकल्प रैली प्रस्तावित कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरान पीएम नई परियोजनाओं की घोषणा भी कर सकते हैं। 

मोदी के लिए पार्टी ने इसलिए भी चुना हल्द्वानी 

अभी तक पीएम नरेन्द्र मोदी की सभा हल्द्वानी में नहीं हुई है। कुमाऊं की राजनीति के लिहाज से यह शहर अधिक महत्वपूर्ण है। आर्थिक, चिकित्सकीय व शिक्षा के अलावा राजनीतिक माहौल को लेकर भी शहर में सरगर्मियां ज्यादा है। पार्टी का कुमाऊं संभाग कार्यालय भी यहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि पहाड़ के 20 विधानसभा सीटों का कोई न कोई व्यक्ति इस शहर में निवास करता है। इसलिए भी यहां की आवाज पहाड़ में प्रभावी तरीके से पहुंचती है। अब देखना होगा कि पार्टी की यह रणनीति कितना सफल हो पाती है। 

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