भव्य स्वरूप ले रहा बदियाकोट का भगवती मंदिर, पहाड़ी शैली में हो रहा सुंदरीकरण

बदियाकोट का भगवती मंदिर परंपरागत हिमालयी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। पहाड़ में अब मंदिर अपनी परंपरागत शैली में नहीं बनाए जाते। मुख्यधारा के मंदिरों का प्रभाव ही दिखाई देता है। मल्लादानपुर क्षेत्र के बदियाकोट में क्षेत्र के लोगों ने मंदिर का जीर्णोद्धार परंपरागत हिमालयी शैली में ही किया।

Prashant MishraThu, 12 Aug 2021 11:13 PM (IST)
हूणों के समय सातवीं से दसवीं शताब्दी तक इस शैली के मंदिर बने।

जागरण संवाददाता, बागेश्वर : पौराणिक महत्व का बदियाकोट स्थित मां भगवती के मंदिर सुंदरीकरण का कार्य तेजी से शुरू हो गया है। शासन से इसके लिए 46.24 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुके हैं।

कपकोट के मल्लादानपुर क्षेत्र में स्थित बदियाकोट का भगवती मंदिर परंपरागत हिमालयी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। पहाड़ में अब मंदिर अपनी परंपरागत शैली में नहीं बनाए जाते। मुख्यधारा के मंदिरों का प्रभाव ही दिखाई देता है। मल्लादानपुर क्षेत्र के बदियाकोट में क्षेत्र के लोगों ने मंदिर का जीर्णोद्धार परंपरागत हिमालयी शैली में ही किया।

पहाड़ में हूणों के समय सातवीं से दसवीं शताब्दी तक इस शैली के मंदिर बने। महासू देवता का मंदिर हूण स्थापत्य शैली का शानदार नमूना हैं। तभी से इस शैली में मंदिर बनाए जा रहे है। कालानंतर में भौगोलिक, सामाजिक, आíथक परिस्थितियों के कारण हूण स्थापत्य शैली, मिश्रित हो गई। जिसमें नागर, द्रविड़ शैली का प्रभाव भी रहा। जिसे बाद में परंपरागत हिमालयी शैली कहा जाने लगा। विधायक बलवंत भौर्याल ने कहा कि जो भी सहयोग होगा किया जाएगा।

मंदिर के निर्माण के लिए सोराग, खाती, किलपारा, बाछम, तीख, डौला, कुंवारी, बोरबलड़ा, पेठी, सापुली आदि गांवों के लोगों ने अपना सक्रिय सहयोग दिया। निशुंभ राक्षस का किया वध बदियाकोट में स्थित श्री आदि बद्री भगवती माता मंदिर का विशेष महत्व है। बदियाकोट में मां ने कन्या के रुप में दर्शन दिए। कहा जाता है कि मां भगवती ने निशुम्भ नामक दैत्य का वध इसी मंदिर के पास किया था। जबकि शुम्भ दैत्य का वध सुमगढ़ नामक स्थान पर किया था। इसी कारण बाद में इसे सुमगढ़ कहा जाने लगा। दैत्यों का वध करने के कारण ही इसे पुराणों में वध कोट के नाम से वर्णित किया गया है। मंदिर समित के अध्यक्ष खिलाप सिंह दानू ने बताया कि मंदिर को भव्य रुप दिया जा रहा है। मंदिर को ऐसा बनाया गया है, जो क्षेत्र की पहचान को दर्शाता है। सितंबर मध्य में भव्य कार्यक्रम किया जाएगा।

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