आर्द्रा नक्षत्र में पहुंचे सूर्यदेव करेंगे राजनैतिक व आर्थिक स्थिति में बदलाव, ज्योतिष के मुताबिक वर्षा ऋतु का आगमन

सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं। आगामी छह जुलाई तक सूर्य की आर्द्रा में मौजूदगी रहेगी। ज्योतिषीय मत के अनुसान सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में जाने से बरसात के मौसम की शुरुआत हो जाती है। मौसम विज्ञानी पहले ही अच्छी बारिश की उम्मीद जता चुक हैं।

Skand ShuklaWed, 23 Jun 2021 07:41 AM (IST)
आर्द्रा नक्षत्र में पहुंचे सूर्यदेव करेंगे राजनैतिक व आर्थिक स्थिति में बदलाव, ज्योतिष के मुताबिक वर्षा ऋतु का आगमन

हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : मंगलवार को सूर्य देव आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं। आगामी छह जुलाई तक सूर्य की आर्द्रा में मौजूदगी रहेगी। ज्योतिषीय मत के अनुसान सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में जाने से बरसात के मौसम की शुरुआत हो जाती है। मौसम विज्ञानी पहले ही अच्छी बारिश की उम्मीद जता चुक हैं। ज्योतिषियों ने भी इस साल अच्छी बारिश की बात कही है। श्री महादेव गिरि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. नवीन चंद्र जोशी का कहना है कि सूर्य की चाल में बदलाव से राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर प्रभाव रहेगा। बड़े प्रशासनिक फैसले हो सकते हैं। कुछ जगहों पर तेज बारिश के कारण प्राकृतिक आपदा की आशंका रहेगी। आर्द्रा नक्षत्र पर राहु का विशेष प्रभाव रहता है। इस समय सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। इससे रोग, व्याधि आदि में कमी आती है।

सूर्य की चाल और भूगोल

सूर्य एक राशि में महीने भर तक रहता है। इस तरह दो राशियां बदलने पर ऋतुओं में भी बदलाव हो जाता है। पिछले दिनों 19 अप्रैल से 21 जून तक सूर्य वृष और मिथुन राशि में रहा। इस दौरान ग्रीष्म ऋतु रहती है। सूर्य के मिथुन से कर्क राशि में आने से बारिश का मौसम शुरू हो जाता है। यह 22 अगस्त तक रहेगा। सूर्य के कन्या व तुला राशि में होने पर सितंबर व अक्टूबर में शरद ऋतु रहेगी। फिर वृश्चिक व धनु राशि में होने पर नवंबर से दिसंबर तक हेमंत ऋतु रहेगी। सूर्य के मकर व और कुंभ राशि में रहने पर दिसंबर आखिरी सप्ताह से फरवरी मध्य तक शिशिर ऋतु रहती है। इसके बाद वसंत ऋतु हरियाली बिखेरती है।

ऊर्जा व आरोग्यता के प्रतीक हैं सूर्य

डा. नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि ज्योतिष में सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। भगवान सूर्य ऊर्जा व आरोग्यता के प्रतीक हैं। सूर्य को संसार की आत्मा कहा जाता है और यह प्रकृति का केंद्र हैं। पशु-पक्षियों व जीवों की सेवा करने से भगवान विष्णु व शिव की कृपा प्राप्त होती है।

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