चाल-खाल को संरक्षित करेगा बागेश्वर, पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की भी योजना, पशुओं को भी मिलेगा लाभ

गरुड़ कपकोट और बागेश्वर विकासखंड में एक-एक खाल का चयन किया गया है। इन चयनित क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की भी योजना है। जिससे पशु-पक्षियों को भी भरपूर पानी मिलने की उम्मीद जगी है।

Prashant MishraSat, 17 Jul 2021 07:15 PM (IST)
पशुओं व किसानों को इसका लाभ मिलेगा वहीं, पर्यटक भी परंपरागत चाल-खाल को निहराने के लिए यहां आएंगे।

जागरण संवाददाता, बागेश्वर : परंपरागत चाल और खाल के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन ने योजना बनाई है। इसके तहत गरुड़, कपकोट और बागेश्वर विकासखंड में एक-एक खाल का चयन किया गया है। इन चयनित क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की भी योजना है। जिससे पशु-पक्षियों को भी भरपूर पानी मिलने की उम्मीद जगी है।

बरसात के पानी को एकत्र करने के लिए पूर्व में ढलान वाले स्थानों पर चाल-खाल बनाने की परंपरा रही है। खाल में लगभग बरसात का पानी छह माह तक रहता था। वह आसपास के जलस्रोतों को भी नया जीवनदान देता था। लेकिन जल महकमों की तमाम योजनाओं के बाद खाल धीरे-धीरे विलुप्त होने लगे। लेकिन अब जिला प्रशासन ने फिर से चाल-खाल को संरक्षित करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत बागेश्वर के किमोली, गरुड़ के माजखेत और कपकोट के पोथिंग गांव में प्राचीन खाल को नया जीवन मिलेगा। चाल-खाल के चारों तरफ चौड़ी पत्ती के पौध भी लगाए जाएंगे। बरसात का पानी इन खालों में जमा होगा। पशुओं व किसानों को इसका लाभ मिलेगा वहीं, पर्यटक भी परंपरागत चाल-खाल को निहराने के लिए यहां आएंगे।

डीडीओ केएन त‍िवारी ने  बताया क‍ि जल संरक्षण के लिए जिले में 47 नम भूमि स्थानों का चयन भी किया गया है। इन चाल-खालों का मनरेगा के तहत 51 लाख रुपये की लागत से जल संरक्षण का काम होगा। इसके अलावा नई पहल के तहत विलुप्त हो रहे परंपरागत चाल-खालों को पुनर्जीवित करने की योजना है।

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