हाईवे पर 20 म‍िनट तक जलता रहा कमल, अफसरों की संवेदनहीनता से बुझा रावत परिवार का चिराग

हाईवे पर 20 म‍िनट तक जलता रहा कमल।
Publish Date:Sat, 26 Sep 2020 08:32 AM (IST) Author: Skand Shukla

हल्द्वानी, संदीप मेवाड़ी: दमुवाढूंगा में रहने वाले रावत परिवार से अकेले नौकरी करने वाले कमल रावत की जान ऊर्जा निगम की लापरवाही से काल ने लील ली। लापरवाही इस कदर हुई कि तार टूटने पर बिजली घर से ब्रेकर ट्रिप होने के पांच मिनट बाद ही कारण पता किए बिना ही लाइन को जोड़कर करंट दौड़ा दिया गया। नौजवान की मौत के बाद भी ऊर्जा निगम के अफसर संवेदनहीन बने रहे। घटनास्थल पर ऊर्जा निगम के अफसर तो दूर कोई कर्मचारी तक नहीं पहुंचा। 

ऊर्जा निगम के 132 केवी बिजली घर काठगोदाम के रिकार्ड के मुताबिक बृज लाल हास्पिटल के पास हाइटेंशन लाइन का तार टूटने पर फीडर का ब्रेकर ट्रिप कर गया था। शनिवार सुबह 8:36 बजे ब्रेकर ट्रिप हुआ था। इसके बावजूद बिजली घर के कर्मचारी व अफसरों ने कारण जानने की कोशिश तक नहीं की। पांच मिनट तक बिजली घर में शिकायत न आने पर 8:41 बजे हाइटेंशन लाइन के ब्रेकर को दोबारा जोड़कर करंट प्रवाहित कर दिया गया। इससे कमल रावत टूटे तार में प्रवाहित हो रहे करंट की चपेट में आ गया। करंट से झुलसकर युवक की मौत का पता चलने पर बिजली घर से 8:55 बजे लाइन काटकर आपूर्ति बाधित की गयी। कमल की मौत के बाद भी ऊर्जा निगम के अफसरों की संवेदना नहीं जागी। घटनास्थल पर लोगों के आक्रोश के बावजूद अफसर नहीं आए। चार घंटे बाद करीब एक बजे महकमे के एसडीओ नीरज पांडे और जेई मो. शाकिब पे पोस्टमार्टम आकर पीडि़त परिवार को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया।

बड़े भाई ने ईई से की लिखित शिकायत 

बड़े भाई नरेंद्र सिंह रावत ने ऊर्जा निगम के सहायक अभियंता को लिखित शिकायती पत्र देकर लापरवाही का आरोप लगाया है। नरेंद्र ने दोषी अफसर व कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ ही कमल की पत्नी को आर्थिक मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग की है। 

तीन सदस्यीय कमेटी करेगी करंट लगने के कारणों की जांच

नैनीताल रोड पर करंट से कमल की मौत के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए ऊर्जा निगम के अधीक्षण अभियंता अमित कुमार शर्मा ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर 10 दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है। जांच कमेटी में अधिशासी अभियंता ग्रामीण अमित आनंद को अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि कमेटी में एसडीओ नीरज पांडे व सहायक अभियंता रोहिताश पांडे को शामिल किया गया है। 

बिजली घर की टेस्टिंग पर उठे सवाल

शनिवार को हुई दुर्घटना ने ऊर्जा निगम में सुरक्षा के लिए किए जा रहे कामों व मोटे खर्चों पर भी सवाल खड़े कर दिए गए हैं। विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एक सप्ताह पहले की 132 केवी बिजली घर काठगोदाम को बंद रखकर टेस्टिंग करायी गयी थी। इसके बावजूद 11केवी हाइटेंशन लाइन का झूलना और तार टूटने का खतरा होना महकमे की पकड़ में नहीं आया। यही नहीं शहर से लेकर गांवों तक रहने वाले क्षेत्रवासी विद्युत लाइनों के झूलने, आपस में टकराने से स्पार्किंग होने, लगातार लोकल फाल्ट आने, घरों में अचानक हाई वोल्टेज और लो वोल्टेज आने से इलेक्ट्रानिक उपकरणों का नुकसान होने की शिकायतें लगातार करते रहे हैं। वहीं ऊर्जा निगम के अफसरों पर लोगों के लाख चिल्लाने का भी असर नहीं दिख रहा है। ऊर्जा निगम की इसी लापरवाही का खामियाजा शुक्रवार को शहर के नौजवान को जान देकर चुकाना पड़ गया। 

चार लाख मिलेगी अनुग्रह धनराशि, 80 हजार तत्कालिक मुआवजा 

ऊर्जा निगम के अफसरों के मुताबिक बिजली के करंट से घातक दुर्घटना होने और किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर महकमे की ओर से उत्तराधिकारी को चार रुपये की अनुग्रह धनराशि दी जाती है। इसके साथ ही 80 हजार तत्काल आर्थिक मुआवजे का प्रावधान है। अधिशासी अभियंता शहर देवेंद्र बिष्ट ने बताया कि पीडि़त परिवार को तत्काल आर्थिक मुआवजा देने के लिए रिपोर्ट बनाकर अधीक्षण अभियंता को भेज दी गयी है। पीडि़त परिवार की ओर से उत्तराधिकारी की जानकारी देते ही धनराशि दी जाएगी। इसके अलावा जांच समिति की रिपोर्ट आने पर शेष अनुग्रह धनराशि 3.20 लाख रुपये उत्तराधिकारी को दिए जाएंगे। 

तो पोल से टच होकर टूटा कंडक्टर

हाइटेंशन लाइन की चपेट में कमल की मौत के बाद अधीक्षण अभियंता ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। हालांकि प्रथम दृष्टया अफसरों का मानना है कि तार का कंडक्टर पोल से टच हो रहा होगा। पोल से टकराने से स्पार्किंग होने से साथ ही कंडक्टर टूट गया और तार टूटकर जमीन पर गिर गया। 

भीड़ बनाती रही विडियो, अकेले ललित बचाने की करता रहा कोशिश

कमल के हाइटेंशन की चपेट में आते ही लोगों की भीड़ आसपास जुट गयी। तमाशबीन मदद के लिए प्रयास करने के बजाय अपने मोबाइल निकालकर जलते हुए कमल का विडियो बनाने में जुट गए। इसी दौराम ललित नाम के एक युवक ने साहस दिखाते हुए समीप के एक ठेले से बांस का डंडा निकाला और तार हटाने के प्रयास शुरू कर दिया। तार हटने के बाद ललित समीप के होटल से अग्निशमन उपकरण लाया और और आग बुझायी। वहीं भीड़ मदद के बजाय ललित को आगे जानने से रोकती रही। ललित ने बताया कि पूर्व में वह पूर्व में फायर का काम कर चुके हैं। जिस कारण उन्हें करंट से लगी आग को बुझाने के तरीकों की जानकारी है। 

माह भर पहले गूंजी थी किलकारी, अब उठी करुण क्रंदन

विद्युत विभाग की लापरवाही से कमल के हंसते-खेलते परिवार के सामने दु:खों का पहाड़ टूट गया। एक माह पहले जिस घर में किलकारी से मंगलगीत गाए जा रहे हैं, वहां से परिवार वालों के रोने की करुण क्रंदन गूंज रही थी। कमल की मौत से पूरे दमुवाढूंगा में मातम छाया गया है। पिछले महीने 22 अगस्त को कमल की बेटी हुई थी। बेटी का नाम भी परी रखा गया। बेटी के जन्म के तीन दिन बाद ही 25 अगस्त को कमल ने पूरे परिवार के साथ अपने चार साल के बड़े बेटे वेदांत का जन्मदिन मनाया था। कमल तीन भाइयों में मझला था। बड़े भाई नरेंद्र रावत कोचिंग पढ़ते हैं। जबकि छोटे भाई अरुण रोजगार की तलाश में हैं। कमल की मौत से पत्नी बीना रावत और मां रेनू रावत का रो-रोकर बुरा हाल था। नाते-रिश्तेदार व परिचित दोनों को ढांढस बंधाने में जुटे थे।

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