top menutop menutop menu

विक्रेताओं ने निश्शुल्क राशन बांटने से खड़े किए हाथ

संवाद सूत्र, लक्सर: लक्सर में राशन विक्रेताओं ने निश्शुल्क खाद्यान्न वितरण करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। हर माह दस से पंद्रह हजार रुपये का नुकसान की बात कहते हुए विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर निश्शुल्क राशन वितरण पर कमीशन देने की मांग की है।

लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत कार्डधारकों को तीन माह तक हर माह प्रति यूनिट पांच किलो गेहूं या चावल उपलब्ध कराया गया था। केंद्र सरकार ने अब यह योजना नवंबर तक बढ़ा दी है। शुरू से ही राशन विक्रेता योजना के तहत राशन वितरण पर कमीशन नहीं मिलने पर एतराज जताते आ रहे हैं। अब नवंबर तक योजना जारी रहने पर राशन विक्रेताओं ने हाथ खड़े कर दिए हैं। लक्सर क्षेत्र के राशन विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया कि योजना के तहत गेहूं, चावल आदि का निश्शुल्क वितरण किया जा रहा है। लेकिन, इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें कोई कमीशन नहीं दिया जा रहा है। इससे गोदाम से दुकान तक खाद्यान्न की ढुलाई, मजदूरी आदि के अलावा बोरे के वजन के नुकसान की भरपाई भी नहीं होने से राशन विक्रेताओं को हर महीने दस से पंद्रह हजार तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विक्रेताओं ने मुख्यमंत्री से निश्शुल्क राशन वितरण पर निर्धारित कमीशन दिलाने और बोरे के वजन की भरपाई की मांग करते हुए ऐसा नहीं होने पर राशन वितरण में असमर्थता जताई है। पत्र भेजने वालों में विनोद कुमार, रियाजुल, तेजपाल, राकेश, मैनपाल, वेदपाल, आदि विक्रेता शामिल रहे। जिला आपूर्ति अधिकारी को सौंपा ज्ञापन

बहादराबाद: सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने राशन उठाने में आ रही दिक्कतों को लेकर जिला आपूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल को ज्ञापन दिया। उन्होंने बताया कि मुफ्त राशन पर कमीशन समेत सभी खर्चे देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। कहा कि काला चना उपभोक्ता लेने को तैयार नहीं दिख रहे हैं, लेकिन उन पर उसे बांटने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें मुफ्त खाद्यान्न का कमीशन नहीं मिलेगा, तब तक वह मुफ्त राशन भी नहीं उठाएंगे। ज्ञापन देने वालों में दिनेश कुमार, रामवती, बिजेंद्र, आशीष, सुरेश, रविद्र आदि रहे।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.