अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी बोले, फर्जी संतों को कुंभ में नहीं मिले किसी तरह की सुविधा

महंत नरेंद्र गिरी ने त्रिकाल भवंता को स्वयंभू शंकराचार्य मानने से किया इनकार।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत नरेंद्र गिरि ने परी अखाड़े की स्वयंभू शंकराचार्य साध्वी त्रिकाल भवंता को शंकराचार्य मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने उन्हें फर्जी संत घोषित करते हुए कुंभ में किसी भी किस्म की सुविधा न दिए जाने की बात कही।

Publish Date:Tue, 24 Nov 2020 11:37 AM (IST) Author: Raksha Panthari

हरिद्वार, जेएनएन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने परी अखाड़े की साध्वी त्रिकाल भवंता को फर्जी करार देते हुए कहा कि फर्जी संतों को कुंभ में किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सनातन धर्म और संन्यास परंपरा से आने वाली साध्वी को ही कुंभ में सुविधाएं देने का समर्थन करता है।

मंगलवार सुबह हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़े में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि त्रिकाल भवंता के मेला अधिष्ठान से परी अखाड़े को भूमि आवंटन करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद इसका विरोध करती है। श्रीमहंत ने कहा कि एक महिला होने के नाते वह त्रिकाल भवंता का सम्मान करते हैं, लेकिन साधु और सन्यासी के तौर उन्हें मान्यता नहीं देते। उन्होंने कहा कि संन्यासी के लिए जरूरी है कि उसका गुरू हो, जिसकी  संगत में उसने अपनी धाॢमक शिक्षा पूरी की हो और अपने पूर्वजों का पिंडदान संस्कार किया हो। इसके अलावा नदी जल में गुरू से आशीर्वाद लेकर अपने केश और वस्त्र का दान कर संन्यास ग्रहण किया हो। उन्होंने कहा कि बिना गुरूके किसी का सन्यासी होना संभव नहीं है। 

श्रीमहंत का बयान आधी आबादी का अपमान : त्रिकाल भवंता

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि के बयान पर साध्वी त्रिकाल भवंता ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे आधी आबादी का अपमान बताते हुए कहा कि श्रीमहंत इस मुद्दे पर धर्म संसद बुलाएं और शास्त्रार्थ करें। स्वयं को नागा संन्यासी बताते उन्होंने कहा कि   शास्त्रार्थ के दौरान वह अपने गुरू के साथ यह भी बताएंगी कि वह किस परंपरा से आती हैं। मंगलवार शाम को मीडिया से बातचीत ने साध्वी ने कहा कि वह श्रीमहंत नरेंद्र गिरि का सम्मान करती हैं, लेकिन  यह जानना चाहती हैं कि उन्हें किस आधार पर फर्जी संत कहा गया। उन्होंने कुंभ मेला अधिष्ठान को चेतावनी दी कि अगर किसी दबाव में परी अखाड़े या उन्हें महिला शंकराचार्य के नाते कुंभ में भूमि आवंटन नहीं किया और शाही जुलूस के साथ ही अलग स्नान की व्यवस्था नहीं की तो वह उसके अदालत की शरण लेंगीं। साध्वी ने आरोप लगाया कि अखाड़ों में महिला संत सुरक्षित नहीं हैं। यही कारण है कि उन्होंने महिला संतों के लिए परी अखाड़े का गठन किया और महिला शंकराचार्य पीठ की स्थापना की। 

यह भी पढ़ें: Haridwar Kumbh 2021: उत्तराखंड के सीएम बोले, दिव्य और भव्य होगा कुंभ; कोरोना की स्थिति देख होगा विस्तार 

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.