नहर में छोड़ा पानी, हरकी पैड़ी समेत गंगा घाटों पर रौनक

दीपावली की रात 12 बजे गंगनहर में पानी छोड़ दिया गया। शुक्रवार दोपहर तक हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटों पर पर्याप्त जल पहुंचने से श्रद्धालुओं के साथ ही कारोबारियों में खासा उत्साह दिखा। हरकी पैड़ी और आसपास गंगा घाटों पर चहल-पहल दिखी।

JagranFri, 05 Nov 2021 08:26 PM (IST)
नहर में छोड़ा पानी, हरकी पैड़ी समेत गंगा घाटों पर रौनक

जागरण संवाददाता, हरिद्वार: दीपावली की रात 12 बजे गंगनहर में पानी छोड़ दिया गया। शुक्रवार दोपहर तक हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटों पर पर्याप्त जल पहुंचने से श्रद्धालुओं के साथ ही कारोबारियों में खासा उत्साह दिखा। हरकी पैड़ी और आसपास गंगा घाटों पर चहल-पहल दिखी। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।

उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग की ओर से हर साल दशहरे की रात से दीपावली की रात तक नहर बंदी की जाती है। इस साल भी दशहरे की रात सालाना बंदी की गई थी। नहर बंदी के 20 दिन में नहर की मरम्मत के अलावा सिल्ट आदि निकालने का कार्य किया गया। दीपावली की रात 12 बजे नहर में पानी छोड़ दिया गया। हालांकि दोपहर तक नहर में वर्तमान मांग के अनुरूप 3500 क्यूसेक पानी पहुंच गया। इधर, नहरों में पानी आने से श्रद्धालुओं से लेकर तीर्थ पुरोहित और कारोबारियों में खासा उत्साह देखने को मिला। हरकी पैड़ी पर पर्याप्त पानी आने से शुक्रवार को खासी चहल-पहल दिखी। श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के साथ ही आसपास मंदिरों में पूजा-अर्चना करते देखे गए। हालांकि नहर बंदी से पहले 7500 क्यूसेक पानी से हरकी पैड़ी के घाट जल से पूरी तरह लबालब थे। अपर रोड क्षेत्र के बाजारों में भी श्रद्धालुओं की अच्छी खासी आमद से कारोबारियों के चेहरे खिले रहे। रजवाहों में पानी आने से किसानों को भी खासी सहूलियत होगी। उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग के एसडीओ शिव कुमार कौशिक ने बताया कि शासनादेश के अनुपालन में दीपावली की रात 12 बजे नहर में पानी छोड़ दिया गया। बताया कि फिलहाल मैदानी क्षेत्रों में पानी की डिमांड कम है। वर्तमान में मांग के अनुरूप 3500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जरूरत अनुरूप इसकी मात्रा बढ़ाई जाएगी।

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छठ पूजन की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं में उत्साह

जलविहीन हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटों पर पानी आने से छठ पूजन की तैयारियों में जुटे श्रद्धालुओं को खासी सहूलियत होगी। लोक आस्था के महापर्व छठ पर श्रद्धालु अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्यदेव को गंगा समेत अन्य जलस्त्रोतों के किनारे घुटनों तक जल में खड़े होकर अ‌र्घ्य देते हैं। इसके पूर्व नहाय खाय पर गंगा स्नान और पूजन के लिए जल भरते हैं।

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