तीनों कृषि कानून रद होने पर किसानों ने बांटी मिठाई

तीनों कृषि कानून रद करने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर उत्तराखंड किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। साथ ही इसे किसानों के लंबे संघर्ष की जीत बताया।

JagranFri, 19 Nov 2021 06:32 PM (IST)
तीनों कृषि कानून रद होने पर किसानों ने बांटी मिठाई

जागरण संवाददाता, रुड़की : तीनों कृषि कानून रद करने की प्रधानमंत्री की घोषणा पर उत्तराखंड किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। साथ ही इसे किसानों के लंबे संघर्ष की जीत बताया। मोर्चा पदाधिकारियों का कहना है कि अब उत्तराखंड सरकार पर दबाव बनाया जाएगा कि जल्द से जल्द किसानों के गन्ने का दाम घोषित किया जाए। साथ ही किसानों को 400 रुपये प्रति क्विटल की दर से गन्ने का दाम दिया जाए।

शुक्रवार को रुड़की के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गुलशन रोड ने कहा कि 11 माह से देश का किसान तीनों कृषि कानून को वापस लेने की मांग कर रहा था। कई किसानों की जान तक चली गई। इसके बावजूद सरकार टस से मस नहीं हो रही थी। किसानों की एकता और संघर्ष ने तानाशाही सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया। 19 नवंबर का दिन देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सात साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब केंद्र सरकार ने अपने कदम वापस खींचे हो। गढ़वाल मंडल अध्यक्ष समीर आलम ने कहा कि यह सत्य की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से अब जो भी निर्णय होगा, उसके अनुसार आगे की रणनीति बनाई जाएगी। इस मौके पर जिलाध्यक्ष महकार सिंह, महबूब हसन, सरवर अली, आकिल हसन, शोएब, सेवाराम, दीपक पुंडीर, रमेश, धर्मेंद्र, विनोद आदि मौजूद रहे। जान गंवाने वाले किसानों को मिले शहीद का दर्जा

रुड़की : किसान मजदूर संगठन सोसायटी के पदाधिकारियों ने रुड़की तहसील मुख्यालय पर धरना दिया। इस मौके पर संगठन के राष्ट्रीय सचिव महक सिंह सैनी ने कहा कि सरकार इस आंदोलन में जान गंवाने वाले सभी किसानों को शहीद का दर्जा दे। क्योंकि सरकार की गलत नीतियों का विरोध करते हुए किसान अपनी जान न्यौछावर कर गए। सैनी ने कहा कि भारत में पूर्व में भी किसान आंदोलन हुए है। सरकारों ने किसानों की जायज मांगों को मना है। कृषि कानून के विरोध में किसानों ने लंबा संघर्ष किया। इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार ने तमाम षडयंत्र रचे। सरकार जब हर तरफ से नाकाम साबित हुई तो इन कानून को वापस लिया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष चौधरी सेठ पाल सिंह, वेद पाल सैनी, बाल चंद सैनी, ब्रह्म सिंह धीमान, अरुण सैनी आदि मौजूद रहे।

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कृषि कानून वापस होने का किया स्वागत

रुड़की : वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं मूल्य एवं लागत आयोग के पूर्व राज्य किसान प्रतिनिधि राजेन्द्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून को वापस लेकर सराहनीय कार्य किया है। सरकार ने यह कदम आगामी वर्ष में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में हार के डर की वजह से उठाया है। सरकार ने किसान आंदोलन को दबाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए। लेकिन, जब किसान टस से मस नहीं हुए तो सरकार को झूकना ही पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देर से ही सही। लेकिन, सही निर्णय लिया है। किसान आंदोलन के दौरान पूरे देश में करीब सात सौ किसानों की मौत हुई है। इसकी जिम्मेदार भी सरकार की है। कहा कि एक दिसंबर को 50 किसान एवं कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधि मंडल कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस सांसदों से मिलेगा। साथ ही मांग की जाएगी कि एमएसपी पर कानून बनाया जाए। इसके लिए संसद में लड़ाई लड़ी जाए। किसानों को इस कानून की सबसे अधिक आवश्यकता है।

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