बाईपास बनाने के बाद जिम्मेदारों ने बिसरा दिया स्टेट हाईवे

चार साल पहले बहादराबाद बाईपास के निर्माण के बाद हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाईपास से शुरू तो हो गयी। लेकिन कस्बे के भीतर से होकर गुजरने वाले पुराने मार्ग को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हादसों को न्यौता दे रहे हैं।

JagranSat, 18 Sep 2021 03:00 AM (IST)
बाईपास बनाने के बाद जिम्मेदारों ने बिसरा दिया स्टेट हाईवे

करण सिंह चौहान, बहादराबाद : चार साल पहले बहादराबाद बाईपास के निर्माण के बाद हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाईपास से शुरू तो हो गयी। लेकिन, कस्बे के भीतर से होकर गुजरने वाले पुराने मार्ग को उसके हाल पर छोड़ दिया गया। मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हादसों को न्यौता दे रहे हैं। जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराने के बाद भी स्थिति जस की तस है।

कस्बे के बीच से होकर हरिद्वार की ओर जाने वाला मार्ग चार साल पहले तक राष्ट्रीय राजमार्ग 58 के नाम से जाना जाता था। बाईपास के निर्माण के बाद इस मार्ग का प्रयोग स्टेट हाईवे के रूप में किया जा रहा है। बहादराबाद से वाया धनौरी भगवानपुर जाने के लिए इस स्टेट हाईवे का प्रयोग किया जा रहा है। इस मार्ग से दिल्ली-देहरादून हाईवे अंतर्गत भगवानपुर 20 किलोमीटर पड़ता है। जबकि पहले रुड़की होते भगवानपुर जाने के लिए 35 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। सहारनपुर, हरियाणा, पंजाब की ओर जाने वाले भी इसी मार्ग का प्रयोग करते हैं। इससे इस मार्ग पर हर वक्त वाहनों का दबाव बना रहता है। मार्ग पर गहरे गड्ढों के चलते दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। कई दोपहिया वाहन चालक चोटिल भी हो चुके हैं। हैरत की बात यह कि संबंधित विभाग इन गड्ढों को भरने की जहमत नहीं उठा रहा। रघुनाथ रेसीडेंसी के सामने गड्ढों में बरसाती पानी भरने से रात के समय ज्यादा बड़े वाहन चालकों को दिक्कत उठानी पड़ रही है।

पूर्व प्रधान बहादराबाद नीरज चौहान ने कहा कि मुख्य मार्ग पर गड्ढे के चलते दुर्घटनाएं हो रही है। कई बार लोनिवि का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया। लेकिन, अधिकारियों ने सुध नहीं ली। स्थानीय निवासी वीरेंद्र सिंह चौहान ने सड़क के दोनों ओर नालों का निर्माण कराए जाने की मांग की है। चेतन चौहान ने कहा कि पूर्व में जब सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था उस दौरान विभागीय अधिकारियों को सड़क की ऊंचाई बढ़ाने को कहा था। लेकिन, ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई। अनिल कथूरिया ने कहा कि सड़क पर बरसाती पानी जमा न हो इसके प्रबंध किए जाने चाहिए। पूर्व में सड़क के दोनों ओर की जमीन सड़क से नीची थी जिसे गाहे कहा जाता था। सिचाई विभाग की ओर से आम के पेड़ लगवाए गए थे जिसमें बरसात का पानी जमा होने के बाद जमीन में समा जाता था। इसके चलते सड़क लंबे समय तक सुरक्षित रहती थी। अब यहां कई जगह अतिक्रमण हो रहा है। -------

सड़क किनारे दर्जनों ढाबे और दूसरे व्यापारिक प्रतिष्ठान खुल गए हैं। अतिक्रमण कर गाहों को मिट्टी डालकर पाट दिया गया है। यही वजह है कि बरसात का पानी सड़क पर जमा हो रहा है। इससे सड़क को नुकसान पहुंचता है। सड़क की मरम्मत को लोनिवि के अधिकारियों से कहा जाएगा।

आदेश चौहान, विधायक, रानीपुर विधानसभा क्षेत्र

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पुराने मार्ग की मरम्मत करा दी जाएगी। मार्ग पर जहां भी गड्ढे हैं उन स्थानों पर समय-समय पर मिट्टी का भराव भी कराया जाता है। कई बार भारी बारिश के चलते मिट्टी बह जाती है। इसको दिखवाया जाएगा।

एसके तोमर, अधिशासी अभियंता, लोनिवि, हरिद्वार

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