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करें सही श्वसन विधि का अभ्यास, दूर भागेगा कोरोना

करें सही श्वसन विधि का अभ्यास, दूर भागेगा कोरोना

संवाद सूत्र रायवाला श्वास शरीर का शासक है यह पूरे दैहिक तंत्र का आधार है। यदि श्वास

JagranMon, 10 May 2021 04:13 AM (IST)

संवाद सूत्र, रायवाला: श्वास शरीर का शासक है, यह पूरे दैहिक तंत्र का आधार है। यदि श्वास विपरीत हो जाए तो पूरे शरीर का रासायनिक तंत्र बिगड़ जाता है, जो अनेकानेक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रोगों का कारण बनता है। श्वास ठीक हो तो व्यक्ति के भीतर ग्रहणशीलता बढ़ जाती है। वर्तमान कोरोना काल को देखते हुए बहुत आवश्यक है कि श्वास की शक्ति का लाभ उठाया जाए तथा स्वयं को सक्षम बनाया जाए। इसके लिए सबसे जरूरी है सही श्वसन विधि।

अर्हत योग न्यास ऋषिकेश के योगाचार्य भूपेंद्र शुक्लेश ऑनलाइन कक्षा के माध्यम से कोरोना से बचाव के कई टिप्स दे रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड हो या न हो, यदि फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने को अभी से अभ्यास करेंगे, तो लाभ ही लाभ है। शरीर की क्षमता बढ़े, मन में संतुलन आए और चित्त शांत रहे तो और क्या चाहिए। श्वसन विधियों से यह सब संभव है। उनका कहना है कि दवा, ऑक्सीजन, आइसीयू आदि की प्रतीक्षा ही क्यों करना, जब अभी आपके पास सबसे सशक्त प्रकृति प्रदत्त शक्ति 'श्वास' साथ है और चल रही है। जरूरी है कि हम अपनी श्वसन पर ध्यान दें और सही विधि से सांस लेने का अभ्यास करें।

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सही श्वसन विधि प्रथम चरण:

लेट जाएं या बैठ जाएं और आंख बंद कर लें। अब दाहिने हाथ को नाभि पर रखें व गहरी श्वास लेने पर सुनिश्चित करें कि नाभि क्षेत्र फूले तथा श्वास छोड़ने पर नाभि क्षेत्र सिकुड़े। बस यही निरंतर करें। ध्यान रखे यदि सांस लेते समय आपका पेट सिकुड़ रहा है तो इसका अर्थ यह है कि आपकी सांस उल्टी चल रही है। बताए गए अभ्यास से इसे ठीक करें।

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सही श्वसन विधि द्वितीय चरण:

लेट जाएं या बैठ जाएं और आंख बंद कर लें। दोनों हाथ कमर के बगल में या घुटनों पर रख लें। अब श्वास लेना आरंभ करें तो पहले निश्चित करें कि श्वास नाभि तक जाए, फिर श्वास और भरते रहें तथा भरते-भरते कंठ तक ले आएं। दो-चार सेकेंड रोकना चाहें, तो रोकें, फिर छोड़ दें। जैसे ग्लास में पानी भरते हैं, ठीक ऐसे ही श्वास नाभि तक जाकर फिर ऊपर भरना शुरू हो। यही प्रक्रिया दोहराएं। उपरोक्त दोनों प्रक्रिया कम से कम 15 मिनट व शेष साम‌र्थ्य के अनुसार करें।

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सत्रह मिनट ध्यान विधि

लेट जाएं या बैठ जाएं, बैठना अधिक लाभकारी है। आंख बंद कर लें। बैठने पर हथेली गोद में रख लें। अब अपने ध्यान को सब ओर से समेटकर नासिका से अपने आप आती-जाती श्वास पर केंद्रित करें। ध्यान बंटने पर बार-बार श्वास के पते पर लौटें। यही अभ्यास सत्रह मिनट चलेगा। इस अभ्यास में यदि आरंभ में नींद आए तो कोई बात नहीं, झपकी लेते रहें। मस्तिष्क का तनाव समाप्त होने पर और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर ठीक होने पर अभ्यास के समय नींद आना बंद हो जाएगी।

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यह बरतें सावधानी -

- किसी श्वसन प्रयोग अथवा ध्यान के प्रयोग के दौरान भूल से भी आंख नहीं खोलना।

- इसे भोजन के एक घंटे बाद ही करें और करने के पंद्रह मिनट बाद कुछ खाएं-पिएं।

- रसोई में पके भोजन की मात्रा कम करके उसके स्थान पर कच्चा खाए जाने वाला भोज्य अधिक लें।

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