उत्तराखंड में हड़ताल पर गए बिजली कर्मियों को लिखित आश्वासन ने दी ऊर्जा, करीब दो घंटे चली वार्ता

मांगों को लेकर हड़ताल पर गए बिजली कार्मिकों को आखिरकार सरकार मनाने में कामयाब रहीं। हालांकि ऊर्जा मंत्री के साथ वार्ता में सहमति बनने के बावजूद भी कुछ कर्मचारी हड़ताल पर अड़े रहे। इसको देख देर रात तीनों निगमों के प्रबंधन ने वार्ता के बिंदुओं का लिखित कार्यवृत्त जारी किया।

Raksha PanthriWed, 28 Jul 2021 10:24 AM (IST)
उत्तराखंड में हड़ताल पर गए बिजली कर्मियों को लिखित आश्वासन ने दी ऊर्जा।

जागरण संवाददाता, देहरादून। मांगों को लेकर हड़ताल पर गए बिजली कार्मिकों को आखिरकार सरकार मनाने में कामयाब रहीं। हालांकि, ऊर्जा मंत्री के साथ वार्ता में सहमति बनने के बावजूद भी कुछ कर्मचारी हड़ताल पर अड़े रहे। इसको देखते हुए देर रात तीनों निगमों के प्रबंधन ने वार्ता के बिंदुओं का लिखित कार्यवृत्त जारी किया, तब जाकर उन्होंने हड़ताल समाप्ति का एलान किया।

मंगलवार को ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत की अध्यक्षता में बिजली कार्मिकों की वार्ता करीब दो घंटे चली। जिसमें 14 सूत्रीय मांगों पर चर्चा की गई। इनमें 10 मांगें निगमों के स्तर की हैं और चार मांगें शासन स्तर की। जिन पर सहमति बनी और जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। पहले बिंदु में 2016 तक लागू एसीपी की व्यवस्था नौ, 14 और 19 वर्ष की सेवा पर दिए जाने को एक जनवरी 2017 के बाद भी यथावत रखा जाएगा। मांगों के निस्तारण के लिए गठित इंदु कुमार पांडे कमेटी की रिपोर्ट एक माह में प्रस्तुत करने की भी बात कही गई। पुरानी पेंशन बहाली की मांग पर यह तय हुआ कि शासन स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कमेटी का गठन किया गया है, यही कमेटी ऊर्जा कर्मियों के मामले को भी निस्तारित करेगी।

संविदा कर्मियों के नियमितीकरण को लेकर प्रस्ताव निदेशक मंडल में जल्द प्रस्तुत किया जाएगा। नव नियुक्त सहायक अभियंताओं, अवर अभियंताओं व तकनीकी ग्रेड-द्वितीय को पूर्व की भांति प्रारंभिक वेतन वृद्धि का लाभ देने की मांग पर इसे कैबिनेट की बैठक में अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया गया। ऊर्जा निगमों में सातवें वेतन आयोग के अनुसार कार्मिकों को विभिन्न भत्तों का रिविजन करने के लिए इंदु कुमार पांडे कमेटी जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। ऊर्जा निगमों के निजीकरण की कार्रवाई रोकने की मांग पर स्पष्ट किया गया कि शासन स्तर पर ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जबकि संविदा कर्मियों को साल में दो बार महंगाई भत्ता व रात्रि पाली भत्ता देने की मांग पर निदेशक मंडल में प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया गया है। टीजी-2 से अवर अभियंता के रिक्त पदों पर पदोन्नति को लेकर 31 अगस्त तक कार्रवाई पूर्ण करने पर सहमति बनी है।

इसके अलावा लाइन लास कम करने और लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली पर नियमित बोनस देने की मांग पर निदेशक मंडल में प्रस्ताव लाने की बात कही गई है। सीधी भर्ती में नियुक्त कार्मिकों को 2015 तक अनुमन्य वेतनमान-ग्रेड पे प्रदान किया जाने की मांग पर भी जल्द निदेशक मंडल में प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया गया। अवर अभियंताओं का ग्रेड वेतन एक जनवरी 2006 से 4800 किए जाने पर शासन की ओर से एक जनवरी 2009 से 4600 ग्रेड पे प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

राज्य में तीनों ऊर्जा निगमों के एकीकरण पर शासन में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सहमति बनी कि किसी भी संवर्ग की सेवा नियमावली संबंधित संगठन की रायशुमारी के बाद ही निदेशक मंडल में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया गया। जबकि, अंतिम मांग पर चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों को तृतीय संबद्ध वेतनमान, अवर अभियंताओं के मूल वेतन 4600 पूर्व की भांति करने पर प्रस्ताव निदेशक मंडल में रखे जाने की बात कही गई। उक्त सहमति और आश्वासन के बाद कार्मिकों ने फिलहाल हड़ताल वापस ले ली है।

कार्यवृत्त पर इन्होंने किए हस्ताक्षर

कार्यवृत्त पर उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे, पावर जूनियर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश चंद्र पंत, हाइड्रो इलेक्टिक इंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष केहर सिंह, उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा, उत्तरांचल बिजली कर्मचारी संघ के महामंत्री प्रदीप कसंल, विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज सैनी, विद्युत प्राविधिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुनील मोघा, विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष विनोद कवि, उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अमित रंजन ने हस्ताक्षर किए।

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