2022 तक सबको आवास की राह में यहां हैं कई चुनौतियां, जानिए

देहरादू, सुमन सेमवाल। प्रधानमंत्री आवास योजना में 24 हजार आवासों के निर्माण पर तस्वीर जरूर साफ हो चुकी है, मगर यह रफ्तार काफी सुस्त है। ऐसे में वर्ष 2022 तक सबको आवास की अवधारणा को साकार करने की राह में अपार चुनौतियां नजर आ रही हैं। क्योंकि विभिन्न विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में 62 हजार सस्ते आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है और करीब चार साल बाद भी प्रगति 39.97 फीसद पर अटकी है। इसमें भी ज्यादातर परियोजनाएं कागजी औपचारिकताओं की प्रक्रिया से गुजर रही हैं। ऐसे में इनका निर्माण कब शुरू होगा, इसको लेकर सवाल बरकरार है। 

प्रधानमंत्री आवास योजना में निजी बिल्डरों ने 21 हजार 198 सस्ते आवास बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, इसमें अभी तक मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) क्षेत्र के उत्तरा बिल्डर के प्रस्ताव को ही केंद्र से अनुमति मिल पाई है। शेष प्राधिकरण क्षेत्रों में बिल्डरों के प्रस्ताव या तो उडा स्तर पर लंबित चल रहे हैं, या उन पर आपत्तियों का निस्तारण होना अभी शेष है। इसी तरह जिन आवास का निर्माण विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर कर रहे हैं, उनकी संख्या 3584 पाई गई है। जबकि अब तक सिर्फ एमडीडीए ही 224 आवासों का निर्माण पूरा कर सका है और एक अन्य परियोजना में 60 फीसद काम पूरा हो चुका है। शेष प्राधिकरण या तो काम शुरू करने की तैयारी में हैं या उनकी टेंडर प्रक्रिया गतिमान है। 

विकास प्राधिकरण को मिले लक्ष्य 

एमडीडीए------------------------15 हजार 

साडा------------------------------10 हजार 

एचआरडीए-----------------------10 हजार 

हल्द्वानी-काठगोदाम------------10 हजार 

रुद्रपुर-----------------------------08 हजार 

काशीपुर---------------------------03 हजार 

किच्छा----------------------------02 हजार 

बाजपुर---------------------------02 हजार 

रामनगर--------------------------02 हजार 

सस्ते आवास के प्रस्तावों की स्थिति 

प्राधिकरण स्तर 

निर्माण कार्य पूरा या प्रगति पर 

एमडीडीए के 224 आवास पूरा, 240 पर प्रगति 60 फीसद। 

भारत सरकार की स्वीकृति 

एमडीडीए की 240 आवास की धौलास योजना, जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की रुद्रपुर स्थित 1872 आवास, व एचआरडीए की 528 आवास की परियोजना को केंद्र से स्वीकृति मिल चुकी है। 

तस्वीर साफ नहीं 

एचआरडीए की 450 आवास की परियोजना अभी भी आपत्तियों के निराकरण की स्थिति में लंबित है। 

निजी बिल्डरों के प्रस्तावों पर प्रगति 

भारत सरकार की स्वीकृति 

एमडीडीए के तहत उत्तरा बिल्डर की 868 आवास की योजना को ही केंद्र से स्वीकृति मिल पाई है। जबकि निजी बिल्डरों के प्रस्ताव में 21 हजार 198 आवासों का निर्माण किया जाना है। शेष के प्रस्ताव या तो उडा स्तर पर लंबित हैं या प्राधिकरण स्तर पर ही लटके पड़े हैं। 

सबके लिए आवास: थोड़ा है थोड़े की और जरूरत है 

एक अदद आशियाना, हर व्यक्ति का सपना होता है, लेकिन आर्थिक दुश्वारियों से लेकर तमाम कारण इसकी राह में बाधक बनते आए हैं। इस सबके मद्देनजर  'प्रधानमंत्री आवास योजना' देशभर के आवासविहीन लोगों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है।

विषम भूगोल वाला उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं है। योजना को लेकर राज्य के लोगों के उत्साह का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अब तक 1.24 लाख आवास की मांग आ चुकी है। हालांकि, यह भी सही है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को शहरी क्षेत्रों में जिस तरह से रफ्तार पकड़नी थी, वह नहीं पकड़ पाई है। 15 जून 2015 को योजना की शुरुआत होने के बाद से अब तक साढ़े तीन साल के वक्फे में महज 3972 सस्ते आवासों के निर्माण पर ही मुहर लग पाई है, जबकि प्रदेश में इस श्रेणी में सर्वाधिक 41852 आवासों की मांग की गई है और इस लक्ष्य को 2022 तक हासिल किया जाना है। अलबत्ता, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की गति संतोषजनक कही जा सकती है। 

वर्ष 2022 तक हर आवासविहीन परिवार को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र की इस योजना के अनुरूप मौजूदा राज्य सरकार ने भी प्रदेश में एक लाख लोगों को इसका लाभ पहुंचाने का इरादा जाहिर किया। इसके लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह योजना संचालित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में जिम्मा आवास एवं शहरी विकास विभाग के पास है तो ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम्य विकास विभाग इसे संचालित कर रहा है। 

पहले बात राज्य के 101 नगर निकायों यानी शहरी क्षेत्रों की करें तो योजना की रफ्तार बढ़ाने को सिस्टम को तेजी से आगे चलना होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत देहरादून शहर की ही तस्वीर बताती है कि यहां वर्ष 2022 तक करीब 15 हजार आवास बनने हैं। इसके सापेक्ष अभी तक बने हैं सिर्फ करीब 10 फीसद ही। कुछ ऐसी ही स्थिति दूसरे शहरी क्षेत्रों की भी है। हालांकि, सरकार ने अब योजना को पूरी तरह धरातल पर उतारने के लिए सिस्टम के पेच कसने के साथ ही तेजी से कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। 

अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) नामक कंपोनेंट में निजी बिल्डरों के सहयोग से बड़ी संख्या में सस्ते आवास तैयार किए जाएंगे। योजना में दिसंबर 2018 तक तक विभिन्न श्रेणियों में 124236 आवासों की मांग आ चुकी है। हालांकि, स्वीकृतियों की बात करें तो सस्ते आवास को छोड़कर अन्य श्रेणी में प्रगति काफी अधिक है। 

निजी भूमि पर निर्माण (बेनिफिसिरी लेड कंस्ट्रक्शन) के तहत नए निर्माण में 14895 आवास व पुराने निर्माण में सुधार के रूप में 6095 आवेदन मिले हैं। इसमें अब तक 14 हजार के करीब आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। क्रेडिट लिंक सब्सिडी के तहत 31 474 आवेदन मिले हैं, जबकि 2151 ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। 

वहीं, राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को ले तो वहां चल रही इंदिरा आवास योजना को पुनर्गठित कर एक अपै्रल 2016 को इसका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण कर दिया गया था। इसका मकसद भी 2022 तक सभी बेघरों और कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को आधारभूत सुविधायुक्त घर प्रदान करना है। 

आर्थिक सर्वेक्षण-2018 पर गौर करें तो योजना में 2015-16 तक लक्ष्य के सापेक्ष सभी आवास पूर्ण किए गए। 2017-18 में 4915 आवास का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से 1210 ही पूरे हो पाए। शेष 3705 का निर्माण चालू वित्तीय वर्ष में पूरा किया, जिस पर 53.61 करोड़ की राशि खर्च की गई। 

योजना की राह में चुनौतियां 

-शहरों का हिस्सा बने 345 गांवों से बड़ी संख्या में आने वाले आवेदन 

-आवास की लगातार बढ़ती मांग के मद्देनजर इसे पूरा कराने को भूमि 

-सस्ते आवास के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता 

-ग्रामीण क्षेत्रों में ढुलान पर आने वाला व्यय 

-पर्वतीय क्षेत्र की स्थिति के अनुरूप योजना में बदलाव 

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