ऋषिकेश: बिजली-पानी के बिलों में बढ़ोतरी के खिलाफ होगा आंदोलन, उत्तराखंड जन विकास मंच ने उठाए सवाल

उत्तराखंड जन विकास मंच ने बिजली व पानी के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि व नगर निगम ऋषिकेश में अतार्किक रूप से लगाए गए स्वकर निर्धारित संपत्ति कर में 50 प्रतिशत छूट के प्रावधान को समाप्त करने की मांग की है।

Sumit KumarFri, 26 Nov 2021 04:14 PM (IST)
उत्तराखंड जन विकास मंच ने 10 दिन के भीतर मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: उत्तराखंड जन विकास मंच ने बिजली व पानी के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि व नगर निगम ऋषिकेश में अतार्किक रूप से लगाए गए स्वकर निर्धारित संपत्ति कर में 50 प्रतिशत छूट के प्रावधान को समाप्त करने की मांग की है। मंच ने 10 दिन के भीतर मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। शुक्रवार को हरिद्वार मार्ग स्थित भगवान आश्रम में उत्तराखंड जन विकास मंच के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता के दौरान यह बातें कही।

मंच ने बिजली के बिलों में वसूले जा रहे निर्धारित चार्ज, फ्यूल चार्ज, विद्युत कर, ग्रीन कर को समाप्त करने व पानी के बिलों में 15 प्रतिशत की अप्रत्याशित वृद्धि को वापस लेने की मांग की। मंच के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि आमजन से जुड़ी इन मांगों को लेकर मंच विभिन्न क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान चलाकर आगामी आंदोलन की रणनीति बना रहा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम ऋषिकेश ने अपने उपभोक्ताओं से स्वकर निर्धारित संपत्ति कर (वित्त वर्ष एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक) पूरा वसूला जा रहा है। जबकि उत्तराखंड जन विकास मंच ने स्वकर निर्धारित संपत्ति कर प्रणाली को लागू करने से पहले इसके गुण दोषों के संबंध में पूर्व नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान, पूर्व नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्‍वीरियाल और महापौर से पत्राचार किया गया था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संपत्ति कर में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा एक कार्यक्रम के दौरान थी, जिसपर गढ़वाल मंडल विकास निगम के पूर्व निदेशक सदस्य आशुतोष शर्मा ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में संपत्ति कर की दर 50 प्रतिशत करने का निवेदन किया था। लेकिन नगर निगम ऋषिकेश की ओर से संपत्ति कर की दर कम न करकेआधी छूट दी गई, जो अब समाप्त हो चुकी है और भविष्य में इसकी रिकवरी उपभोक्ताओं से की जा सकती है।

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जबकि हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) की कैटेगरी एक्स, वाई और जेड क्लास के शहरों के हिसाब से है। जोकि क्रमश 24 प्रतिशत, 16 प्रतिशत व आठ प्रतिशत मिलता है। इसमें भी वाइ श्रेणी के निगमों में देहरादून बी2 श्रेणी में आता है। जबकि ऋषिकेश श्रेणी सी के अंतर्गत आता है। ऐसे में ऋषिकेश नगर निगम के उपभोक्ताओं पर झांसी लखनऊ जैसे बड़े सुविधा संपन्न नगर निगमों की तरह संपत्ति कर लगाना अनुचित अतार्किक व मनमाना है। उन्होंने कहा कि एचआरए कैटेगरी के शहरों के अनुसार ऋषिकेश नगर निगम में स्व कर निर्धारित संपत्ति कर की दर एक तिहाई से अधिक नहीं होनी चाहिए।

उत्तराखंड जन विकास मंच के सचिव लेखराज भंडारी ने कहा कि मंच पानी व बिजली के ज्वलंत मुद्दों के साथ संपत्ति कर विषय को भी प्रमुखता से जनता व सरकार के सम्मुख उठाएगा। यदि मंच की मांगों पर 10 दिन के पश्चात भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो मंच धरना प्रदर्शन व आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इस दौरान रामकृपाल गौतम, जनार्दन नवानी, राजेंद्र पाल, देवेंद्र बेलवाल, आदेश शर्मा, राजू गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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