उत्तराखंड: गढ़वाल-कुमाऊं प्रभार पर भिड़ीं कांग्रेस की दो महिला नेता, हाथापाई करने को तैयार; राष्ट्रीय मीडिया समन्वय ने संभाली बात

कांग्रेस के दो प्रदेश प्रवक्ता गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के प्रभार को लेकर आपस में भिड़ गए। इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट को लेकर भड़के इस विवाद से पार्टी की दोनों महिला प्रवक्ताओं के बीच हाथापाई की नौबत आ गई।

Raksha PanthriFri, 30 Jul 2021 10:36 AM (IST)
गढ़वाल-कुमाऊं प्रभार पर भिड़ीं कांग्रेस की दो महिला नेता।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। कांग्रेस के दो प्रदेश प्रवक्ता गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के प्रभार को लेकर आपस में भिड़ गए। इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट को लेकर भड़के इस विवाद से पार्टी की दोनों महिला प्रवक्ताओं के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। बाद में केंद्रीय नेतृत्व की ओर से उत्तराखंड में तैनात राष्ट्रीय मीडिया समन्वय जरिता लेटफ्लेंगे ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत किया।

दरअसल, बीते रोज कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने दो प्रदेश प्रवक्ताओं को गढ़वाल व कुमाऊं का मीडिया प्रभारी बनाया था। प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी को गढ़वाल मंडल और प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया को कुमाऊं मंडल का प्रभार दिया गया है। दोनों को प्रदेश मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि के निर्देशन में काम करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि गरिमा दसौनी को गढ़वाल मंडल का प्रभारी बनाए जाने पर प्रदेश प्रवक्ता डा प्रतिमा सिंह ने इंटरनेट मीडिया पर टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों का प्रभार एक ही क्षेत्र के व्यक्तियों को दिया गया है।

कांग्रेस से जुड़े रहे पूर्व प्रदेश पदाधिकारी गिरीशचंद्र ने भी गरिमा की तैनाती को मुखबिरी और रिश्तेदारी का ईनाम बताते हुए इंटरनेट मीडिया पर टिप्पणी कर दी। हालांकि बाद में पार्टी हाईकमान के फैसले को लेकर की गईं ये दोनों टिप्पणी इंटरनेट मीडिया से हटा दी गईं। गुरुवार शाम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक जरिता लेटफ्लेंगे की अध्यक्षता में हो रही प्रदेश प्रवक्ताओं और मीडिया प्रभारियों की बैठक के बाद दोनों प्रवक्ताओं गरिमा दसौनी और डा प्रतिमा सिंह के बीच तीखी कहासुनी हो गई।

एकदूसरे पर तल्ख टिप्पणी से हाथापाई की नौबत भी आ गई। बाद में जरिता के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। डा प्रतिमा सिंह डीएवीपीजी कालेज में विधि विभाग में प्रवक्ता हैं। इस विवाद ने एक बार फिर पार्टी के भीतर असंतोष की सुगबुगाहट को सतह पर ला दिया है। माना ये भी जा रहा है कि इस मामले को अनुशासनहीनता के तौर पर भी लिया जा सकता है।

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