इस गांव का अजब हाल, 14 साल बीत गए, लेकिन नहीं बन पाई दो किमी की सड़क; जिम्मेदारों पर लग रहे ये आरोप

सड़क निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने और टेंडर प्रक्रिया के बाद भी 14 साल में दो किमी सड़क नहीं बन पाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोनिवि के अधिकारी सड़क निर्माण के लिए फिर से एस्टीमेट मांगे जाने की बात कहकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं।

Raksha PanthriTue, 30 Nov 2021 10:14 AM (IST)
इस गांव का अजब हाल, 14 साल बीत गए, लेकिन नहीं बन पाई दो किमी की सड़क।

संवाद सहयोगी, मसूरी। उत्तराखंड का लोक निर्माण विभाग कितनी गंभीरता से कार्य करता है, इसकी बानगी का एक नमूना यह भी है कि सड़क निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने और टेंडर प्रक्रिया के बाद भी 14 साल में दो किमी सड़क नहीं बन पाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि लोनिवि के अधिकारी सड़क निर्माण के लिए फिर से एस्टीमेट मांगे जाने की बात कहकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं।

मामला टिहरी जिले के जौनपुर विकासखंड के नैनबाग तहसील के अंतर्गत दिल्ली-यमुनोत्री नेशनल हाईवे को जोडऩे वाले सुमनक्यारी-बणगांव-सुरांसू-खरक-कांडी मोटर मार्ग का है। जिसका निर्माण कार्य 2003-04 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के शासन में स्वीकृत किया गया था। प्रथम चरण में सुमनक्यारी से खरक गांव तक 12 किमी सड़क के लिए वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर भी स्वीकृत हो गए थे। वर्ष 2007 तक 10 किमी, सुरांसू गांव तक सड़क का कटान कार्य पूरा हो गया था।

इसके आगे दो किमी सुरांसू व खरक गांव के बीच में कटिंग भी हो गई, लेकिन उसके आगे निर्माण कार्य रोक दिया गया, जो आज तक उसी स्थिति में है। लोनिवि थत्यूड़ को खरक गांव के ग्रामीणों ने सैकड़ों बार इस बाबत जानकारी दी, लेकिन अधिकारी यह कहकर टालते रहे कि पहले का बजट खर्च हो गया है, इसके लिये फिर से एस्टीमेट बना रहे हैं। खरक गांव के पूर्व प्रधान सरदार सिंह रावत एवं विनिता रावत का कहना है कि जब वित्तीय स्वीकृति व टेंडर प्रक्रिया 12 किमी के लिए थी तो दो किमी का पैसा कहां खर्च किया गया, इसका जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।

खरक गांव के शूरवीर सिंह तोमर और श्याम सिंह रावत के अनुसार, सुरांसू से खरक गांव के बीच दो किमी सड़क निर्माण में आ रही जमीन का मुआवजा भी सभी ग्रामीणों को दिया जा चुका है फिर लोनिवि सड़क क्यों नहीं बना रहा है। नैनबाग तहसील के सभी गांव सड़क से जुड चुके हैं, सिर्फ खरक और मेलगढ गांवों के साथ यह भेदभाव क्यों हो रहा है। सड़क नहीं होने से काश्तकारों को अपनी नकदी फसलों को सड़क तक पहुंचाने और बीमारी की स्थिति में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

खरक गांव के दीवान सिंह, कुंवर सिंह, नरेंद्र सिंह, ज्ञानदास, बिक्रूलाल, भगतू लाल, जगदीश आदि ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनावों से पूर्व ग्रामीणों ने मतदान नहीं करने की बात कही थी, तब अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता कर आश्वासन दिया था कि शीघ्र ही सड़क निर्माण किया जाएगा, लेकिन आज तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई।

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