सियासत का अखाड़ा बना कर्मकार कल्याण बोर्ड, इससे सरकार और संगठन को होना पड़ रहा असहज

श्रमिक हितों के कल्याण के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड सियासत का अखाड़ा बन गया है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल और श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत के मध्य खिंची तलवारों ने सरकार और भाजपा संगठन दोनों को असहज कर दिया है।

Raksha PanthriSat, 19 Jun 2021 08:11 AM (IST)
सियासत का अखाड़ा बना कर्मकार कल्याण बोर्ड।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। श्रमिक हितों के कल्याण के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड सियासत का अखाड़ा बन गया है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल और श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत के मध्य खिंची तलवारों ने सरकार और भाजपा संगठन दोनों को असहज कर दिया है। साथ ही विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार पर हमलावर होने का मुद्दा मिल गया है। अब प्रदेश भाजपा ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए पार्टी नेताओं को बयानबाजी से बचने की नसीहत दी है। इसके अलावा बोर्ड के संबंध में सचिव श्रम की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी गई रिपोर्ट पर सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी निगाह टिकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बोर्ड में टकराव की स्थिति बन गई है।

ऐसे उपजा बोर्ड में विवाद

प्रदेश में वर्ष 2017 में प्रचंड बहुमत से सत्तासीन होने के बाद श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी देख रहे थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों के क्रम में शासन ने पिछले वर्ष अक्टूबर में हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटाकर शमशेर सिंह सत्याल को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। सत्याल को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र का करीबी माना जाता है।

हालांकि, तब श्रम मंत्री हरक सिंह ने उन्हें हटाने का विरोध किया था। बाद में त्रिवेंद्र सरकार ने बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया। सत्याल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने नवंबर में पिछले बोर्ड के फैसले पलट दिए। इसके बाद पिछले बोर्ड के कार्यकाल के आडिट, बोर्ड की ओर से साइकिल वितरण में कथित गड़बड़ी, ईएसआइ अस्पताल के लिए 20 करोड़ की राशि बतौर ऋण देने संबंधी मसले सुर्खियों में रहे। ईएसआइ अस्पताल के संबंध में तो त्रिवेंद्र सरकार ने जांच भी कराई थी। तब से बोर्ड अध्यक्ष और श्रम मंत्री के बीच खिंची तलवारें म्यान में जाने का नहीं ले रहीं।

सत्याल-हरक अब फिर आमने-सामने

सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मौजूदा तीरथ सरकार ने बोर्ड की सचिव का जिम्मा श्रमायुक्त दीप्ति सिंह से हटाकर हरिद्वार की उपश्रमायुक्त मधु नेगी चौहान को सौंप दिया। इसके बाद से बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव के बीच पटरी नहीं बैठ रही। दोनों ने ही एक-दूसरे पर मनमाना रवैया अपनाने के आरोप जड़े हैं। इस बीच बोर्ड के अध्यक्ष सत्याल ने सचिव के बहाने श्रम मंत्री हरक सिंह रावत के अध्यक्षीय कार्यकाल में हुए कार्यों को लेकर उन पर निशाना साधा है। श्रम मंत्री ने भी सत्याल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि वह कुछ व्यक्तियों के इशारे पर सरकार और संगठन की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही कहा कि बोर्ड अध्यक्ष नियमों के विपरीत जाकर कार्य कर रहे हैं।

फैसलों को लेकर विरोधाभास

बोर्ड के फैसलों को लेकर भी विरोधाभास की स्थिति है। श्रम विभाग के अधीन होने के कारण बोर्ड को कोई भी नया कदम उठाने से पहले शासन से अनुमोदन लेना अनिवार्य है। बोर्ड की सचिव ने हाल में चार कर्मियों को उपनल को वापस कर दिया था, जबकि अध्यक्ष ने उन्हें फिर बहाल कर दिया। इसी तरह अध्यक्ष ने सचिव को कार्यमुक्त करने का पत्र थमाया है, जबकि सचिव का कहना है कि बिना शासन की अनुमति के वह ऐसा नहीं कर सकते।विपक्ष को मिला मुद्दाकर्मकार बोर्ड में चल रहे विवाद को विपक्ष ने लपकने में देर नहीं लगाई और वह सरकार के खिलाफ हमलावर है। ऐसे में सरकार और संगठन दोनों ही असहज हुए हैं। चर्चा है कि इस बीच श्रम मंत्री के अलावा कुछ अन्य मंत्रियों, विधायकों के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से वार्ता कर प्रकरण के समाधान को निर्णय लेने का आग्रह किया है।

बोर्ड भंग कर सकती है सरकार

सचिव श्रम की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट और कर्मकार बोर्ड में चल रही रार को देखते हुए सरकार इसका समाधान निकालने में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड को भंग करने, सचिव को हटाने समेत अन्य कई विकल्पों पर विचार चल रहा है। जल्द ही इस बारे में फैसला लिया जाएगा।

श्रम मंत्री डा हरक सिंह रावत का कहना है कि कर्मकार बोर्ड के अध्यक्ष मनमाने निर्णयों से सरकार व संगठन की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है। वह जल्द ही इस संबंध में निर्णय लेंगे। कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल ने बताया कि मुझे पद का कोई लालच नहीं है। हाल में श्रम मंत्री ने मेरे कार्यकाल की जांच कराने की बात कही थी। जांच का मैं स्वागत करता हूं। मैं मुख्यमंत्री से यह भी आग्रह करूंगा कि पिछले बोर्ड के कार्यकाल में हुए कार्यों को लेकर हुई जांच भी सार्वजनिक की जाए। वहीं, भाजापा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने कहा, कर्मकार बोर्ड में चल रहे विवाद के बाद हो रही बयानबाजी का पार्टी ने संज्ञान लिया है। इस बारे में जल्द ही मुख्यमंत्री से वार्ता की जाएगी। साथ ही पार्टीजनों से कहा गया है कि वे बयानबाजी से बचें।

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