Chardham Yatra: चारधाम यात्रा पर अगले हफ्ते फैसला ले सकती है सरकार, सीएम रावत ने दिए संकेत

Chardham Yatra चारधाम यात्रा के लिए 21 जून तक मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) जारी करने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री तीरथ रावत ने कहा कि अगले हफ्ते तक कुछ छूट के साथ चारधाम यात्रा के संबंध में सरकार फैसला ले सकती है।

Raksha PanthriWed, 16 Jun 2021 10:58 PM (IST)
चारधाम यात्रा पर अगले हफ्ते फैसला ले सकती है सरकार।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। Chardham Yatra चारधाम यात्रा के लिए 21 जून तक मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) जारी करने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सरकार भी सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि अगले हफ्ते तक कुछ छूट के साथ चारधाम यात्रा के संबंध में सरकार फैसला ले सकती है। इसमें आरटीपीसीआर की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य करने के साथ ही स्थानीय आधार पर दर्शन की इजाजत दी जा सकती है।

सरकार ने 14 जून को तीन जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के निवासियों को आरटीपीआर की निगेटिव रिपोर्ट के साथ अपने-अपने जिलों के धामों में दर्शन की अनुमति देने की घोषणा की थी, लेकिन शाम को यह फैसला वापस ले लिया गया। बताया गया कि यात्रा को लेकर देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की तैयारियां नहीं थीं, साथ ही हाईकोर्ट में भी चारधाम से संबंधित मामला विचाराधीन है। इसे देखते हुए यात्रा का फैसला टाला गया।

अब हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में सरकार एसओपी तैयार करने समेत अन्य कदम उठाने में जुट गई है। सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को यात्रा के मद्देनजर तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड जल्द ही एसओपी भी तैयार करेगा।

हरीश रावत ने लिया रामबाड़ा में स्मृति संग्रहालय बनाने का संकल्प

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने कहा कि केदारनाथ त्रासदी वस्तुत: हिमालयी त्रासदी थी। उन्होंने त्रासदी में अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए व्यक्तियों की स्मृति में रामबाड़ा में संग्रहालय बनाने के अधूरे काम को पूरा करने का संकल्प भी लिया। केदार घाटी में आपदा की बरसी पर इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ ने त्रासदी के प्रकोप को कम किया। उनके आशीर्वाद से उत्तराखंड पूरी हिम्मत से जुटा और एक साल के अंदर ही त्रासदी के सारे घावों को भर दिया। व्यवस्था फिर चल पड़ीं, चार धाम यात्रा अविरल रही। पर्यटन और विकास, दोनों पटरी पर आ गए। यह चमत्कार भगवान केदारनाथ के आशीर्वाद के बिना पूरा नहीं हो सकता था।

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