जंगलों में सूखी पत्तियों से बनेगी जैविक खाद, इस पहल से जंगल होंगे सुरक्षित; मिलेगा राजस्व भी

जंगलों में सूखी पत्तियों से बनेगी जैविक खाद, इस पहल से जंगल होंगे सुरक्षित।

उत्तराखंड के जंगलों में हर साल पतझड़ में पेड़ों से गिरने वाली लाखों टन पत्तियां गर्मियों में आग के फैलाव की वजह नहीं बनेंगी। अब इन पत्तियों को संसाधन के तौर पर लेते हुए इनसे जैविक खाद बनाने की तैयारी है। वन महकमा इसकी कार्ययोजना बना रहा है।

Raksha PanthriSun, 18 Apr 2021 06:30 AM (IST)

केदार दत्त, देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों में हर साल पतझड़ में पेड़ों से गिरने वाली लाखों टन पत्तियां गर्मियों में आग के फैलाव की वजह नहीं बनेंगी। अब इन पत्तियों को संसाधन के तौर पर लेते हुए इनसे जैविक खाद बनाने की तैयारी है। वन महकमा इसकी कार्ययोजना बना रहा है। जैविक खाद बनाने के मद्देनजर इसे मनरेगा से भी जोड़ने पर विचार चल रहा है। इस पहल के परवान चढ़ने पर जंगल सुरक्षित रहेंगे ही, राजस्व भी मिलेगा। खासकर, 14 हजार किलोमीटर लंबी फायर लाइनों के रखरखाव में भी यह खासी मददगार साबित होगी।71.05 फीसद वन भूभाग वाले इस राज्य में आग से हर साल ही वन संपदा को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंच रही है। 

आग के फैलने की बड़ी वजह जंगलों में पेड़ों से गिरकर जमा होने वाली सूखी पत्तियां भी हैं। खासकर, चीड़ की पत्तियां (पिरुल) तो आग में घी का काम करता है। वन विभाग के अधीन 2441480.41 हेक्टेयर जंगल हैं। इनमें अकेले चीड़ से ही प्रतिवर्ष 23.66 लाख मीट्रिक टन पत्तियां गिरती हैं। ऐसी ही स्थिति अन्य प्रजातियों के वनों को लेकर भी है।इस सबको देखते हुए अब वनों में आग की समस्या से पार पाने के उपायों के तहत सूखी पत्तियों को संसाधन के तौर पर लेकर इनका उपयोग करने की तैयारी है। वन एवं पर्यावरण मंत्री डा.हरक सिंह रावत के निर्देशों के क्रम में सूखी पत्तियों से जैविक खाद तैयार करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। 

वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी के अनुसार इस पहल के तहत वन क्षेत्रों में गड्ढे तैयार कर वहां खाद बनाई जा सकती है। इस प्रयोग को कैसे धरातल पर मूर्तरूप दिया जा सकता है इस संबंध में वन संरक्षक शिवालिक को पिरुल से जुड़े उद्यमियों के साथ ही विशेषज्ञों से वेबिनार के माध्यम से राय लेने को भी कहा गया है। भरतरी ने बताया कि जैविक खाद का प्रयोग पहले पायलट आधार पर किया जाएगा और फिर धीरे-धीरे इसे विस्तार दिया जाएगा।

राज्य में विभाग के अधीन प्रजातिवार वन क्षेत्र

प्रजाति, क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

विविध-मिश्रित, 614361 

चीड़, 393383.84

बांज, 383088.12 

साल, 313054.20

फर व स्प्रूस, 92464.84

यूकेलिप्टस, 21411.73

सागौन, 20209.16

देवदार, 18783.35

कैल, 18548.83

शीशम, 15114.19

खैर, 5796.61

सुरई, 2965.11

अनुत्पादक, रिक्त आदि, 541299.43

वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावक ने बताया कि जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों से गिरने वाली पत्तियों का उपयोग जैविक खाद बनाने के मद्देनजर अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्तियों के एकत्रीकरण समेत अन्य कार्यों के लिए इसे मनरेगा से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जंगलों पर आग का खतरा कम होने के साथ ही जैविक खाद से विभाग को आय भी होगी।

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