उत्तराखंड: जनता का फोन नहीं उठाना पुलिस अधिकारियों को पड़ेगा भारी, होगी कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों की ओर से फोन न उठाने की मिल रही शिकायतों का पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने संज्ञान लिया। उन्होंने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को आदेश जारी किए हैं कि फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

Raksha PanthriFri, 17 Sep 2021 04:06 PM (IST)
जनता का फोन नहीं उठाना पुलिस अधिकारियों को पड़ेगा भारी, होगी कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड में पुलिस अधिकारियों की ओर से फोन न उठाने की मिल रही शिकायतों का पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने संज्ञान लिया। उन्होंने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को आदेश जारी किए हैं कि फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

आदेश में कहा गया है कि आम जनमानस से शिकायतें मिल रही हैं कि जब वह पुलिस अधिकारियों को अपनी शिकायतों के संबंध में फोन करते हैं तो अधिकारी फोन नहीं उठाते है, जोकि अनुचित है। आम जनमानस के फोन आने पर पुलिस अधिकारी तत्काल रिसीव करें। यदि किसी कारण फोन उठाना संभव नहीं हो तो संबंधित स्टेनो या पीआरओ से फोन रिसीव करवाएं। समय मिलते ही काल बैक कर समस्या का निस्तारण करें, जिससे पब्लिक में पुलिस के प्रति विश्वास बना रहे।

इसके अलावा अधिकारी अपने अधीनस्थ नियुक्त सभी अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, थाना, चौकी प्रभारियों से भी आम जनमानस के काल को तत्काल रिसीव करवाकर शिकायत का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करवाएं। डीजीपी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इसके बाद भी यदि किसी पुलिस अधिकारी की फोन न उठाने संबंधी शिकायत मिलती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि काम के प्रति लापरवाही को बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा।

बाल श्रम पर नजर रखे एलआइयू

जिला अधिकारी डा. आर राजेश कुमार ने जिला टास्क फोर्स की बैठक में बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति को सामाजिक अभिशाप करार दिया। उन्होंने बच्चों को इस दलदल में धकेलने वालों के खिलाफ कार्रवाई और मुक्त कराए बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य की दिशा में उचित कदम उठाने के निर्देश। गुरुवार को बैठक में जिलाधिकारी डा. आर राजेश कुमार ने कहा कि टास्क फोर्स व श्रम विभाग अपने निगरानी तंत्र को मजबूत करे।

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हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

एलआइयू (स्थानीय अभिसूचना इकाई) इस काम में विशेष भागीदारी निभाए। ताकि दूसरे राज्यों में बाल श्रम व भिक्षावृत्ति के लिए लाए जाने वाले बच्चों को मुक्त कराया जा सके। निरंतर छापेमारी कर हर 15 दिन में इसकी रिपोर्ट दी जाए। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को मुक्त कराया जा रहा है, उनके माता-पिता की खोज भी कराई जाए। इसके अलावा जिलाधिकारी ने श्रमिकों के पंजीकरण की दिशा में भी ठोस काम करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) डा. एसके बरनवाल, सहायक श्रमायुक्त एससी आर्य आदि उपस्थित रहे।

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