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अस्पताल में भर्ती होने के लिए अब कोरोना की पाजिटिव रिपोर्ट जरूरी नहीं, नया प्रोटोकॉल लागू

अस्पताल में भर्ती होने के लिए अब कोरोना की पाजिटिव रिपोर्ट जरूरी नहीं।

Uttarakhand Coronavirus News उत्तराखंड में कोविड हेल्थ सेंटर अथवा अस्पतालों में भर्ती के लिए अब कोरोना की पाजिटिव टेस्ट रिपोर्ट होना जरूरी नहीं होगा। कोरोना की आशंका वाले मरीजों की अवस्था को देखकर उन्हें कोविड केयर सेंटर से लेकर जिला अस्पताल में भर्ती करना होगा।

Raksha PanthriFri, 14 May 2021 08:48 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, देहरादून। Uttarakhand Coronavirus News उत्तराखंड में कोविड हेल्थ सेंटर अथवा अस्पतालों में भर्ती के लिए अब कोरोना की पाजिटिव टेस्ट रिपोर्ट होना जरूरी नहीं होगा। कोरोना की आशंका वाले मरीजों की अवस्था को देखकर उन्हें कोविड केयर सेंटर से लेकर जिला अस्पताल में भर्ती करना होगा। साथ ही मरीजों को भर्ती के दौरान परिचय पत्र दिखाने की व्यवस्था लागू नहीं होगी। 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और केंद्र सरकार के निर्देशों के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमितों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और उन्हें अस्पतालों में भर्ती को लेकर को लेकर नया प्रोटोकाल लागू कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव डा पंकज कुमार पांडेय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसके तहत कोरोना पीड़ित मरीजों के लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है। कम संक्रमित मरीजों को कोविड केयर सेंटर, अधिक संक्रमितों को डिस्ट्रिक्ट कोविड हेल्थ सेंटर और गंभीर मामलों को जिला कोविड अस्पतालों में भेजा जाएगा। 

कोरोना उपचार से जुड़े सरकारी और निजी अस्पतालों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक मरीजों को भर्ती करने और उपचार की व्यवस्था का पालन करना अनिवार्य होगा। कोरोना की आशंका वाले मरीजों को पाजिटिव रिपोर्ट को आधार बनाकर भर्ती करने से इन्कार नहीं किया जा सकेगा। ऐसे व्यक्ति को सस्पेक्ट वार्ड में भर्ती कराया जाएगा। किसी भी मरीज को उपचार यानी आक्सीजन अथवा जरूरी दवाइयों अथवा अन्य शहर से संबंध रखने की वजह से भर्ती करने से अस्पताल रोक नहीं सकेंगे। 

इसके साथ ही संबंधित शहर का वैध परिचय पत्र को आधार बनाकर भी मरीजों को उपचार अथवा अस्पतालों में भर्ती करने से मना नहीं किया जाएगा। अस्पतालों में बेड को लेकर मारामारी को लेकर भी व्यवस्था बनाई गई है। अब अस्पतालों में भर्ती के लिए मर्ज के मुताबिक मरीजों की जरूरत का ध्यान रखा जाएगा। जिस व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है, उसे बेड नहीं देने के सख्त निर्देश हैं। इसकी व्यवस्था बनाने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही केंद्र की ओर से मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की संशोधित नीति का पालन अनिवार्य किया गया है।

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