उत्‍तराखंड में चुनौती न बन जाए रिजल्ट की ऊंची उड़ान, पढ़िए पूरी खबर

कोरोना संकटकाल में बगैर परीक्षा के घोषित 10वीं व 12वीं के परिणामों ने आम छात्र-छात्राओं को भले ही बड़ी राहत दे दी लेकिन शिक्षा विभाग को आने वाले वर्षों में गुणवत्ता के मोर्चे पर अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा।

Sunil NegiSun, 01 Aug 2021 06:30 AM (IST)
उत्‍तराखंड में चुनौती न बन जाए रिजल्ट की ऊंची उड़ान

रविंद्र बड़थ्वाल, देहरादून। कोरोना संकटकाल में बगैर परीक्षा के घोषित 10वीं व 12वीं के परिणामों ने आम छात्र-छात्राओं को भले ही बड़ी राहत दे दी, लेकिन शिक्षा विभाग को आने वाले वर्षों में गुणवत्ता के मोर्चे पर अग्नि परीक्षा से गुजरना होगा। बोर्ड की दोनों ही कक्षाओं में बीते वर्ष की तुलना में 22-22 फीसद से ज्यादा छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण हुए। 40 से 45 फीसद कामयाबी हासिल करने वाले प्राइवेट छात्र-छात्राओं के पास होने के ग्राफ ने रेगुलर की तुलना में बहुत ऊंची उड़ान भरी है।

बीते वर्ष 2020 में उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं व 12वीं का परीक्षाफल क्रमश: 76.91 और 76.78 फीसद रहा था। वर्ष 2021 में यह परीक्षाफल क्रमश: 99.09 और 99.41 फीसद है। कोरोना काल में बने इस रिकार्ड की खास बात ये है कि बोर्ड के रेगुलर से ज्यादा प्राइवेट छात्र-छात्राएं परीक्षाफल के लिहाज से लाभ की स्थिति में रहे हैं। बीते वर्ष 10वीं में 37.22 फीसद प्राइवेट और 72.44 फीसद रेगुलर छात्र उत्तीर्ण हुए थे। इसी तरह 12वीं में 45.38 फीसद प्राइवेट और 78.21 फीसद रेगुलर छात्रों को परीक्षा में कामयाबी मिली थी।

इस साल 10वीं में 95.53 फीसद प्राइवेट और 99.39 फीसद रेगुलर छात्र उत्तीर्ण हुए। 12वीं में 97.63 फीसद प्राइवेट और 99.47 फीसद रेगुलर छात्र उत्तीर्ण हुए हैं। पिछले साल की तुलना में 10वीं में 22.18 फीसद और 12वीं में 22.73 छात्र ज्यादा उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। बोर्ड परीक्षा में कामयाबी के मोर्चे पर पीछे रहने वाले प्राइवेट छात्रों के लिहाज से कोरोना काल में परिणाम अधिक अनुकूल रहे हैं।

उत्तराखंड जैसी विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में कोरोना महामारी ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विसंगतियों को भी रेखांकित किया है। कोरोना की दूसरी घातक लहर की वजह से बोर्ड परीक्षाएं कराने की सभी तैयारी धरी की धरी रह गईं। बाद में परीक्षाफल की तैयारी के काम को शिक्षक, स्कूल और बोर्ड अधिकारियों की मदद से बेहतर तरीके से अंजाम दिया गया।

कोरोना की वजह से आनलाइन और आफलाइन पढ़ाई से वंचित रहे छात्रों तक पहुंचने के लिए इच्छाशक्ति की कमी विभाग और सरकार दोनों स्तरों पर दिखी। माध्यमिक स्कूलों को इंटरनेट कनेक्टिविटी से जोड़ने और पंचायतों के माध्यम से आनलाइन पढ़ाई के प्रयासों को अंजाम देने पर विचार करने की जरूरत नहीं समझी गई। बड़ी संख्या में बगैर पढ़ाई के कक्षोन्नत किए गए छात्रों के विषय ज्ञान के स्तर पर प्रतिकूल असर को कम करने के लिए भी कदम उठाए जाने की जरूरत है। अन्यथा आने वाले समय में बोर्ड के 12वीं कक्षा और उच्च शिक्षा के परिणामों पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

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