सत्ता के गलियारे से: अपने नेताओं को बुलाने से कतराती है कांग्रेस

Uttarakhand Assembly Elections 2022 भाजपा को अपने प्रांतीय नेताओं पर भरोसा नहीं इसलिए प्रधानमंत्री को बार-बार आना पड़ रहा है। भाजपा भला कैसे चुप रहती प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने ऐसा तंज कसा कि कांग्रेस नेताओं की बोलती बंद।

Raksha PanthriMon, 29 Nov 2021 10:22 AM (IST)
सत्ता के गलियारे से: अपने नेताओं को बुलाने से कतराती है कांग्रेस।

विकास धूलिया, देहरादून। Uttarakhand Assembly Elections 2022 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस हफ्ते उत्तराखंड आ रहे हैं। तीन महीने में तीसरा दौरा, चुनाव के मौके पर कांग्रेस इससे असहज होगी ही। जड़ दिया आरोप कि भाजपा को अपने प्रांतीय नेताओं पर भरोसा नहीं, इसलिए प्रधानमंत्री को बार-बार आना पड़ रहा है। भाजपा भला कैसे चुप रहती, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने ऐसा तंज कसा कि कांग्रेस नेताओं की बोलती बंद। कौशिक बोले कि कांग्रेस की दिक्कत यह है कि वह अपने केंद्रीय नेताओं को चुनाव के लिए प्रचार करने को बुलाने से कतराती है। अब इसके कांग्रेस नेताओं ने कई निहितार्थ तलाश लिए। कोई बोला कि भाजपा को कांग्रेस के ग्रुप 23 के नेताओं के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं, कुछ बोले कि अपने गिरेबां में झांको पहले। इसी बीच इंटरनेट मीडिया में जनवरी 2017 की राहुल गांधी की जनसभा के दौरान कुर्ते की फटी जेब से हाथ निकालने वाली तस्वीर तैरने लगी। तिलमिलाहट लाजिमी है।

भाजपा रच रही रावत के लिए चुनावी चक्रव्यूह

चुनाव नजदीक हैं तो नेताओं के ताबड़तोड़ दौरों का क्रम भी शुरू हो गया है। भाजपा की तरफ से पूरा दारोमदार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर है। वह लगातार अलग-अलग जिलों में पहुंच रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से यह जिम्मा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उठा रहे हैं। रावत कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के मुखिया भी हैं और पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा भी। अलबत्ता, रावत का ज्यादा वक्त कुमाऊं मंडल में गुजर रहा है, हालांकि हरिद्वार को भी पूरी तवज्जो मिल रही है। मुख्यमंत्री धामी भी लगातार कुमाऊं के चप्पे-चप्पे पर नजर बनाए हुए हैं। चुनावी रणनीतिकारों की मानें तो भाजपा पूरी तरह रावत की घेराबंदी में जुटी है। अगर रावत को क्षेत्र विशेष तक सीमित रखने में भाजपा कामयाब रहती है तो इससे कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ना तय है। रावत भी इससे वाकिफ हैं। देखना यह है कि रावत इस चक्रव्यूह को भेद पाते हैं या नहीं।

चुनावी चूल्हे में पक तो रही है खिचड़ी

विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षित भविष्य की तलाश में इधर-उधर जाने का सिलसिला जारी है। उत्तराखंड में पांच साल पहले कांग्रेस से 10 विधायक भाजपा में आए थे, इनमें से एक अपने विधायक पुत्र सहित वापस घर लौट गए। इसके बाद कांग्रेसी मूल के नेताओं को लेकर भाजपा में तमाम लोग सशंकित हैं, पता नहीं किसे घर की याद सताने लगे। स्थिति यह कि भाजपा और कांग्रेस के कुछ नेता आपस में किसी भी कारण अगर मिल लिए, तो सत्ता के गलियारों में तूफान उठ खड़ा होता है। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और सुबोध उनियाल की नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से मुलाकात हुई तो चर्चाओं का दौर शुरू। एक जगह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत आमने-सामने क्या हुए, कयासबाजी चलने लगी। अब तो लोग पूछने लगे हैं कि चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस के कुछ नेताओं की खिचड़ी पक रही है क्या।

किशोर ने मांगे महिलाओं के लिए 70 टिकट

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री किशोर उपाध्याय चुनाव से ठीक पहले अलग राग छेड़े हुए हैं। कांग्रेस किसी तरह सत्ता में वापसी की मशक्कत में जुटी है और नेताजी रोज नया मुद्दा उछाल पार्टी नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा रहे हैं। कभी हरीश रावत के राइट हैंड कहे जाते थे, आजकल पुरानी बातों को लेकर दोनों हाथ जोड़े उन्हें कोस रहे हैं। किशोर ने नया शिगूफा छोड़ा है। अब अचानक डिमांड कर डाली कि सभी 70 विधानसभा सीटों पर महिलाओं को ही टिकट दिया जाना चाहिए। बोले, जब महिलाएं घर-परिवार चलाने से लेकर हर क्षेत्र में अपना सिक्का जमा रही हैं तो क्या सरकार नहीं चला सकतीं। तर्क में दम तो है, लेकिन इसने कांग्रेस नेताओं को सांसत में डाल दिया है। उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की बात प्रियंका गांधी कह चुकी हैं, किशोर इससे भी आगे निकल गए।

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