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उत्तराखंड में करो या मरो के अंदाज में मंजिल तय करेगी कांग्रेस

उत्तराखंड में करो या मरो के अंदाज में मंजिल तय करेगी कांग्रेस।

Uttarakhand Assembly Election 2022 उत्तराखंड में सत्ता वापसी की चाह कहिए या सियासी जमीन पाने को करो या मरो की हालत कांग्रेस पूरी ताकत से आगे का रास्ता तय करने जा रही है। रोचक बात ये है कि सतह पर अंतर्कलह के पूरे नाटकीय तत्व मौजूद हैं।

Raksha PanthriMon, 17 May 2021 04:09 PM (IST)

राज्य ब्यूरो, देहरादून। Uttarakhand Assembly Election 2022 उत्तराखंड में सत्ता वापसी की चाह कहिए या सियासी जमीन पाने को करो या मरो की हालत, कांग्रेस पूरी ताकत से आगे का रास्ता तय करने जा रही है। रोचक बात ये है कि सतह पर अंतर्कलह के पूरे नाटकीय तत्व मौजूद हैं और इनके अलग-अलग अंदाज आगे दिखने तय हैं। बावजूद इसके मिशन 2022 को लेकर दिग्गज नेताओं के बीच अंदरखाने सुलह, समझ और समाधान की अंतर्धारा ने अपना काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में सूबे की सियासत में बड़े उलटफेर के इरादे से रणनीति को अंजाम देने की तैयारी है। 

पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजय और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार ने प्रदेश में कांग्रेस को पस्तहाल किया है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी पिछले इतिहास को दोहराने के पक्ष में नहीं है। पार्टी रणनीतिकारों की चिंता ये है कि अगले चुनाव में सत्ता में वापसी नहीं होने की सूरत में मुश्किल हालात को संभालना मुमकिन नहीं होगा। केंद्रीय नेतृत्व भी इन परिस्थितियों पर नजदीकी निगाह रख रहा है। 

सबसे पहले चरण में तैयारी प्रदेश में क्षत्रपों को साधने की है। ऐसे में पार्टी में सतह पर भले ही गुटीय खींचतान का पूरा दृश्य खासोआम के लिए बदस्तूर जारी रहे, लेकिन अंदरखाने दिग्गजों में एकजुट होकर चुनावी जंग में कूदने को लेकर सहमति बनना शुरू हो गई है। प्रदेश की कुल 70 विधानसभा सीटों में से तकरीबन दो दर्जन सीटों पर अपनी स्थिति को अपेक्षाकृत कमजोर आंक रही पार्टी चुनाव आने तक एक ठोस रणनीति के साथ सामने आने की तैयारी में है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने सल्ट उपचुनाव में कई दिनों तक खुद चुनाव प्रचार में उतरकर इसके संकेत दे दिए हैं। 

प्रत्याशी चयन में भी इस दौरान आपसी सहमति और मजबूत दावेदार पर दांव खेलने की मशक्कत हो रही है। इसे लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक दौर का गंभीर चिंतन-मनन हो भी चुका है। दरअसल प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी और सरकार और भाजपा के भीतर उलटफेर के बाद कांग्रेस में अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने की उम्मीद बढ़ी है। पार्टी में नए मनोबल को साफ महसूस भी किया जा रहा है।

ऐसे में प्रदेश संगठन और पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच संतुलन साधने को कांग्रेस हाईकमान और प्रभारी दोनों सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव की मानें तो कांग्रेस अपनी पूरी ताकत के साथ अगले चुनाव में जुटने जा रही है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह कहते हैं कि कांग्रेस के भीतर मतभेद नहीं हैं, जिन्हें मतभेद कहा जा रहा है, वह आंतरिक लोकतंत्र है। 

प्रीतम का भविष्य तय करेंगे चुनाव

अगला विधानसभा चुनाव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुके प्रीतम सिंह के कौशल की असली परीक्षा विधानसभा चुनाव में ही होनी है। पार्टी का भविष्य और प्रीतम का कद दोनों ही चुनाव के नतीजे तय करेंगे। चुनाव में जीत को अंतिम लक्ष्य मानकर संगठन का जोर अब मतभेदों और मनभेदों को दूर करने पर है। कोरोना से हालत सुधरने के बाद पार्टी की ये नई रणनीति सामने आ सकती है।

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