उत्तराखंड: उपनल कर्मियों की एमडी से हुई बात, नहीं निकला समाधान

उपनल कर्मियों की एमडी से हुई बात, नहीं निकला समाधान।

उपनल कर्मियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। इस दौरान प्रदेशभर से आए कर्मचारियों ने एकता विहार स्थित धरनास्थल पर प्रदर्शन किया। वहीं भारतेंदु नेगी मोहन नेगी कुलदीप बुदियाल प्रकाश जोशी कुलदीप वर्मा रवि विश्वकर्मा विजय रावत संदीप व बृजमोहन जोशी क्रमिक अनशन पर रहे।

Raksha PanthriTue, 02 Mar 2021 08:05 AM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। उपनल कर्मियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। इस दौरान प्रदेशभर से आए कर्मचारियों ने एकता विहार स्थित धरनास्थल पर प्रदर्शन किया। वहीं भारतेंदु नेगी, मोहन नेगी, कुलदीप बुदियाल, प्रकाश जोशी, कुलदीप वर्मा, रवि विश्वकर्मा, विजय रावत, संदीप व बृजमोहन जोशी क्रमिक अनशन पर रहे। उपनल कर्मियों ने अपना सचिवालय कूच फिलहाल स्थगित कर दिया है। 

उपनल के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा ने सोमवार को उपनल कर्मियों को वार्ता के लिए बुलाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हड़ताल समाप्त करने की बात कर रहे हैं। पर कर्मचारियों ने कहा कि पहले उनकी मांगों पर विचार किया जाए। जिसके बाद प्रबंध निदेशक ने अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से बात की। पर कर्मचारियों की मांगों पर कोई सहमति नहीं बन पाई। अब प्रबंध निदेशक ने मंगलवार को उन्हें दोबारा शासन स्तर पर वार्ता के लिए बुलाया है।

इधर, राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री सोहन सिंह माजिला व राज्यकर विभाग के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र रावत ने उपनल कर्मियों की मांगों का समर्थन करते हुए राज्य सरकार से इन पर विचार करने का अनुरोध किया। धरने में प्रदेश अध्यक्ष कुशाग्र जोशी, अभिनव जोशी, मनोज सेमवाल, रोहित वर्मा, जितेंद्र गोस्वामी, हिमांशु जुयाल, प्रकाश जोशी, मीना, शशि, गरिमा आदि शामिल रहे। 

राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ का उपनलकर्मियों को समर्थन

आंदोलन पर डटे उननलकर्मियों को राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने समर्थन दिया है। इस संबंध में महासंघ ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र लिखकर कर्मचारियों की समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश गुसाईं ने कहा कि उपनल कर्मचारी बार-बार मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लंबे समय तक विभिन्न विभागों, निगम, निकाय में सेवा करने के बाद भी कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि उनकी मांग को पूरा करने का प्रयास किया जाए।

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