उत्तराखंड: कर्मचारी नेताओं से वार्ता में भड़के प्रबंध निदेशक दीपक रावत, फिर नरम करने पड़े तेवर

यूपीसीएल और पिटकुल के प्रबंध निदेशक (एमडी) का पदभार संभालते ही आइएएस दीपक रावत के सामने कार्मिकों की हड़ताल की चुनौती आ गई। कुर्सी पर बैठने के अगले ही दिन उनकी कर्मचारी नेताओं के साथ नोकझोंक हो गई।

Raksha PanthriWed, 28 Jul 2021 02:15 PM (IST)
कर्मचारी नेताओं से वार्ता में भड़के प्रबंध निदेशक दीपक रावत, फिर नरम करने पड़े तेवर।

जागरण संवाददाता, देहरादून। यूपीसीएल और पिटकुल के प्रबंध निदेशक (एमडी) का पदभार संभालते ही आइएएस दीपक रावत के सामने कार्मिकों की हड़ताल की चुनौती आ गई। कुर्सी पर बैठने के अगले ही दिन उनकी कर्मचारी नेताओं के साथ नोकझोंक हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को चेतावनी देने लगे। बाद में प्रबंध निदेशक को ही अपने तेवर नरम करने पड़े।

मंगलवार को प्रबंध निदेशक दीपक रावत ने हड़ताल पर डटे कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया। बातचीत ऊर्जा भवन स्थित कार्यालय में बंद कमरे में चल रही थी। इसी दौरान प्रबंध निदेशक उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक पर बिफर पड़े। यह देख कर्मचारियों का भी पारा चढ़ गया। दोनों तरफ से एक-दूसरे को ऊंची आवाज में चेतावनी दी जाने लगी।

कर्मचारी नेता के साथ गलत व्यवहार करने और दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद कर्मचारी वार्ता बीच में ही छोड़ कक्ष से चल दिए। कर्मचारियों की नाराजगी से प्रबंध निदेशक के तेवर नरम पड़ गए। हालात को भांपते हुए उन्होंने कर्मचारियों के साथ किए गए व्यवहार के लिए खेद प्रकट किया। इसके बाद वह कर्मचारी नेताओं के साथ शालीनता से पेश आए।

मंत्री संग वार्ता के बाद सामने आए कार्मिकों में मतभेद

उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले ऊर्जा कार्मिकों के प्रतिनिधिमंडल की कौशल विकास भवन के एक कक्ष में ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत के साथ मंगलवार शाम को दो घंटे तक वार्ता चली। इस वार्ता को सफल बताते हुए दोनों पक्षों ने हड़ताल समाप्त किए जाने की बात कही। दूसरी तरफ, कक्ष के बाहर बैठे कर्मचारी हड़ताल समाप्त न करने पर अड़े रहे। कार्मिकों का कहना था कि जब तक कार्यवृत्त जारी नहीं हो जाता, वह हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। वहीं, प्रबंध निदेशक दीपक रावत ने ऊर्जा मंत्री का लिखित अनुमोदन प्राप्त होने के बाद ही कार्यवृत्त पर हस्ताक्षर करने की बात कही।

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