दो बुजुर्गों के हौसले की अनूठी गंगा परिक्रमा

अक्सर उम्र के जिस पड़ाव में लोग रिटायर होकर घर बैठ जाते हैं उस उम्र में दो बुजुर्ग प्रयागराज से गोमुख तक 6500 किलोमीटर की अकल्पनीय गंगा परिक्रमा पर निकले हैं।

JagranThu, 28 Oct 2021 03:00 AM (IST)
दो बुजुर्गों के हौसले की अनूठी गंगा परिक्रमा

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश : अक्सर उम्र के जिस पड़ाव में लोग रिटायर होकर घर बैठ जाते हैं, उस उम्र में दो बुजुर्ग प्रयागराज से गोमुख तक 6500 किलोमीटर की अकल्पनीय गंगा परिक्रमा पर निकले हैं। अब तक अपनी 5600 किलोमीटर की यात्रा पूरी करके ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम (जौंक) क्षेत्र में पहुंचे अहमदाबाद के हीरेन पटेल और सेवानिवृत्त कर्नल आरपी पांडे का स्थानीय नागरिकों तथा जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया।

सेवानिवृत्त कर्नल आरपी पांडे तथा किसान हीरेन पटेल ने इस दौरान पत्रकारों को बताया कि 16 दिसंबर 2020 को प्रयागराज से गंगा परिक्रमा की अपनी पैदल यात्रा शुरू की थी। प्रारंभ में सभी ने उनकी इस यात्रा को लेकर कई प्रकार की बातें कहीं। लेकिन उन्होंने उसकी परवाह नहीं की जिसका नतीजा यह रहा कि 10 महीने की कड़ी मेहनत के बाद वह 5600 किलोमीटर की पैदल यात्रा वह पूरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि 900 किलोमीटर की गंगा परिक्रमा अभी शेष रह गई है, जो आगामी कुछ महीनों में पूरी हो जाएगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड के निवासियों ने गंगा यात्रा के दौरान उनकी बहुत मदद की। रहने खाने पीने से लेकर जंगलों की लोकेशन बताने में उन्होंने अपनी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि इस पैदल यात्रा के जरिये वह मां गंगा की निर्मलता व पवित्रता को बनाने के लिए आम जन को जागरूक करना चाहते हैं। उन्होंने गंगा में पूजा पाठ के नाम पर डाली जाने वाली सामग्री पर प्रतिबंध लगाने की सरकार से मांग की है।

बुधवार को स्वर्गाश्रम पहुंचने पर सेवानिवृत्त कर्नल आरपी पांडे तथा किसान हीरेन पटेल का स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स ने स्वागत किया।

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राष्ट्र की समृद्धि में नदियों का बड़ा योगदान

गंगा परिक्रमा पदयात्रा पर निकले रिटायर्ड कर्नल आरपी पांडे और अहमदाबाद, गुजरात के हिरेन पटेल ने बुधवार को परमार्थ निकेतन पहुंचकर स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात की। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने इस यात्रा के सफल होने की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र की समृद्धि और पतन के अध्यायों में वहां की नदियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। मां गंगा ने तो अपने प्रवाह में अनेकों युगों की दास्तान को सहेज कर रखा है। वैसे नदियां तो पूरे विश्व में है परंतु गंगोत्री, उत्तराखंड से निकलने वाली गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि मां है। मां गंगा के दर्शन मात्र से ही मन को शांति मिलती है। विश्व की वह पहली नदी है जिसके तटों पर अस्त होते सूर्य के साथ जय गंगे माता का स्वर गूंजने लगता है। आरपी पांडे ने स्वामी चिदानंद सरस्वती को यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। पदयात्रा के सदस्यों ने परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों, एनसीसी कैडेट, ऋषिकेश और जीजीआइसी कालेज के छात्रों व शिक्षकों के साथ विश्व ग्लोब का जलाभिषेक कर जल संरक्षण का संकल्प लिया।

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