मुसीबत के फ्लाइओवर में वाहनों की गति पर ब्रेक, चौतरफा जाम

देहरादून, जेएनएन। बल्लीवाला चौक पर लगने वाले जाम की जिस समस्या से जनता को निजात दिलाने के लिए मार्च 2013 में फ्लाईओवर निर्माण का शिलान्यास किया गया था, वही स्थिति फ्लाईओवर के संचालन के करीब ढाई साल बाद दोबारा पैदा हो गई है। इसकी वजह ऐसा प्रयोग बना है, जिसे शायद ही देश के किसी फ्लाईओवर पर किया गया हो। फ्लाईओवर पर राष्ट्रीय राजमार्ग खंड डोईवाला ने पहले एक लेन पर जगह-जगह रंबल स्ट्रिप्स वाले स्पीड ब्रेकर बनाए और अब दूसरी लेन को भी स्पीड ब्रेकर से पाट दिया है। 800 मीटर के इस फ्लाईओवर पर गति पर तो ब्रेक लग गया है, मगर हिचकोलों ने लोगों को नई परेशानी में डाल दिया है।

स्थिति यह हो गई है कि ज्यादातर चालकों ने इस पर से गुजरने से तौबा कर ली है। कारण यह है कि फ्लाईओवर से गुजरने का मतलब अनगिनत हिचकोले खाना तो है ही, रफ्तार पर ब्रेक लग जाने से पूरा फ्लाईओवर जाम से पटा रहता है। फ्लाईओवर की जगह अब बड़ी संख्या में वाहनों के फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने से सिंगल लेन से भी पतली सड़क पर अब जाम बढ़ने लगा है।

यहां व्यस्ततम समय में जाम की स्थिति विकट हो जा रही है। ऐसे में राजमार्ग खंड के इस प्रयोग पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जनता पर इस तरह के फ्लॉप आइडिया कब तक थोपे जाते रहेंगे।

स्थानीय लोगों को उठानी पड़ रही परेशानी

फ्लाईओवर किए गए इस बेतुके प्रयोग का खामियाजा बल्लीवाला चौक से सटे कांवली रोड और वसंत विहार रोड के लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है। अब तक जिन लोगों को जीएमएस फ्लाईओवर से नहीं गुजरना होता था, वह आराम से नीचे से गुजर रहे थे, जबकि अब नीचे भी वाहनों का दबाव बढ़ने से स्थानीय लोगों को बेवजह जाम में फंसना पड़ रहा है।

प्रयोग पर प्रयोग का क्या मतलब

इससे पहले दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए दिसंबर 2017 में फ्लाईओवर का सेफ्टी ऑडिट किया गया था। तब ऑडिट रिपोर्ट की संस्तुति के आधार पर फ्लाईओवर को बीचों-बीच स्प्रिंग पोस्ट लगाकर दो भागों में बांट दिया गया था। तब अधिकारी तर्क दे रहे थे कि वाहन चालक एक दूसरे को ओवरटेक करने की जगह चुपचाप आगे-पीछे चलते रहेंगे। यह प्रयोग फेल साबित हुआ तो अब पूरे फ्लाईओवर को स्पीड ब्रेकर से पाट दिया गया। जिसका हश्र सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसा हो गया है।

अंकुश के नाम पर सहूलियत भी छीन ली

स्पीड ब्रेकरों की भरमार देखकर लगता है कि अधिकारियों ने रफ्तार पर अंकुश लगाने के नाम पर सड़क पर सुगम यातायात की सहूलियत भी छीन ली है। पहले स्पीड ब्रेकर उस लेन पर लगाए गए थे, जहां तीव्र मोड़ है। मगर, दुपहिया चालकों ने रास्ता निकाला कि स्पीड ब्रेकर से बचने के लिए दूसरी लेन (रॉन्ग साइड) पर चला जाए। इससे हादसा होने की आशंका और बढ़ गई, लिहाजा दूसरी लेन पर भी स्पीड ब्रेकर बना दिए गए। बेशक रॉन्ग साइड पर चलना जान पर खेलने जैसा है, मगर अंकुश के नाम पर सुगम यातायात को दुरूह बनाना भी किसी दशा में उचित नहीं।  

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर निदेशालय की नजर

ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले पुलिस कर्मियों पर निदेशालय ने नजर रखना शुरू कर दिया है। इसके लिए निदेशालय ने सभी जनपदों के एसपी और एसएसपी को पत्र लिखते हुए नियम का पालन न कराने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खासकर बिना हेलमेट और मोबाइल फोन पर बात करते वक्त वाहन चलाने वालों से सख्ती से पेश आने को कहा गया है। 

ट्रैफिक निदेशालय को विभिन्न माध्यमों से सूचना मिली कि जनपदों में तैनात कुछ पुलिस कर्मी ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कराते हैं। इन पर बिना हेलमेट, ट्रिपल राइडिंग, वाहन चलाते वक्त मोबाइल फोन का प्रयोग करने जैसे नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। इससे पुलिस की छवि आम लोगों के बीच धूमिल हो रही है। 

ट्रैफिक निदेशक केवल खुराना ने सभी जनपदों के एसपी, एसएसपी को पत्र लिखते हुए कहा कि पुलिस को सख्ती से नियमों का पालन कराना है। उन्होंने सभी जनपद के एसपी और एसएसपी से अपेक्षा की कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। नियम तोड़ने वाले पुलिस कर्मियों को चिह्नित कर उन्हें सूचीबद्ध करें। इधर, ट्रैफिक निदेशालय ने सीपीयू, ट्रैफिक पुलिस को हिदायत दी कि ट्रैफिक नियमों का स्वयं और दूसरों को भी पालन कराना सुनिश्चित करें। 

नियुक्त कर्मियों का ब्यौरा मांगा 

ट्रैफिक व्यवस्था बनाने के लिए निदेशालय ने सभी जनपदों से तैनात फोर्स का ब्यौरा मांगा है। वर्तमान में तैनात पुलिस कर्मियों, चालानकर्ता अधिकारियों की सूची, नाम, पद और कब से जनपद में तैनात हैं, पूरा विवरण मांगा गया है। इसके अलावा जनवरी से मार्च 2019 तक किए गए चालानों का विवरण भी दो दिन के भीतर निदेशालय को दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें: इस खूनी फ्लाइओवर में रफ्तार पर ब्रेक लगाने को अब स्पीड ब्रेकर

यह भी पढ़ें: दून में बदहाल सार्वजनिक परिवहन, हिचखोले खा रही है जिंदगी

यह भी पढ़ें: बल्लीवाला फ्लाईओवर के डिजाइन में होगा बदलाव, जानिए इसके पीछे की वजह

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.