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पहाड़ से आवक घटी तो लाल हुआ टमाटर, कीमत पहुंची 50 से 60 रुपये प्रति किलो

देहरादून, जेएनएन। एक सप्ताह के भीतर ही टमाटर के दाम दो से ढाई गुना बढ़ गए हैं। कारण यह कि पहाड़ में टमाटर की फसल लेट हो गई है और पड़ोसी राज्यों में बारिश के कारण टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है। दून के बाजार में टमाटर और 'लाल' हो गया है। मंडी समिति ने जल्द आवक में सुधार आने पर दाम सामान्य होने की उम्मीद जताई है। फल-सब्जियों के दाम में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है, लेकिन जब आलू-प्याज व टमाटर के दाम बढ़ जाएं तो आम आदमी का बजट जरूर बिगड़ जाता है। सर्दियों में कई महीने तक प्याज ने रुलाया। बीच में सब्जियों के दाम सामान्य हुए, पर अब टमाटर जायका बिगाड़ रहा है। 

एक सप्ताह के भीतर दून में टमाटर के दाम दो गुना बढ़ गए हैं। यानि 25 जून को जो दाम 25 से 30 रुपये प्रति किलो थे वह अब 50 से 60 रुपये तक पहुंच गए हैं। आवक में सुधार न आया तो दामों में और उछाल आ सकता है। हालांकि, मंडी समिति के निरीक्षक अजय डबराल के मुताबिक सप्ताहभर में टमाटर के दाम सामान्य होने की उम्मीद है। बताया कि टमाटर के अलावा अन्य सब्जियों के दाम नियंत्रण में हैं। आलू और प्याज का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

मंडी से दो गुने अधिक दाम पर बेच रहे वेंडर

टमाटर के दाम बाजार में आसमान छू रहे हैं, लेकिन मंडी में थोक दाम में इतना इजाफा नहीं हुआ है। मंडी में गुरुवार को टमाटर का थोक भाव 25 से 30 रुपये प्रति किलो रहा। जबकि, बाजार में 40 रुपये से 60 रुपये प्रति किलो टमाटर बेचा गया। मंडी में एक फीसद मंडी शुल्क और ढुलाई का खर्च लगाकर भी यह टमाटर 32 से 35 रुपये प्रति किलो वेंडर को पड़ता है। ऐसे में मुनाफा जोड़ने के बाद भी 50 रुपये किलो टमाटर बेचना गले नहीं उतरता। 

बारिश से भी हुआ नुकसान 

मंडी समिति से मिली जानकारी के अनुसार इस समय मंडी में हरियाणा के लाडवा और उप्र के अमरोहा से टमाटर मंगाया जा रहा है। लेकिन, यहां भी बारिश के कारण टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे आवक घट गई है। इधर, पहाड़ से दून मंडी में हर रोज करीब 200 कुंतल टमाटर आता था, लेकिन फसल लेट होने के कारण महज 50 कुंतल टमाटर ही पहुंच रहा है।

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