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सेवानिवृत्त होगी थ्री नॉट थ्री, इंसास को मिलेगी तैनाती; पढ़िए पूरी खबर

देहरादून, संतोष तिवारी। आजादी के बाद से पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही थ्री नॉट थ्री रायफल को उत्तराखंड पुलिस भी 'सेवानिवृत्त' करने की तैयारी कर रही है। इसकी जगह पुलिस कर्मियों को इंसास रायफल दी जाएगी। जो हल्की होने के साथ कई मायनों में खास है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तो इसी गणतंत्र दिवस पर पुरानी पीढ़ी के मगर सबसे कारगर इस हथियार को आखिरी सलामी देने जा रहा है।   

आजादी के बाद देश ने जहां हर क्षेत्र में उल्लेखनीय तरक्की की। वहीं, उत्तराखंड पुलिस के अधिकांश जवान आज भी कंधे पर थ्री नॉट थ्री रायफल टांगे नजर आते हैं। हालांकि, इस रायफल में कई ऐसी खूबियां हैं, जो यह इतने सालों तक पुलिस की पसंदीदा रही। मगर अब आधुनिक असलहों के आ जाने के बाद इसकी उपयोगिता कम होती जा रही है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारी इसकी विदाई पर मंथन करने में जुट गए हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि थ्री नॉट थ्री को महकमे से बाहर करने के लिए कितने हथियारों की जरूरत पड़ेगी। 

अब दिखेगी इंसास 

पुलिसकर्मियों को थ्री नॉट थ्री रायफल की जगह अब इंसास (इंडियन स्माल आर्म्स सिस्टम) दी जा रही है। थ्री नॉट थ्री की लंबाई ज्यादा होने से पुलिसकर्मियों को दिक्कत होती थी। इस रायफल की लंबाई 44.5 इंच है, जिसमें बैरल की लंबाई 25 इंच होती है। वहीं, इंसास की लंबाई तकरीबन 37.8 इंच है। इसके बैरल की लंबाई 18.3 इंच और मारक क्षमता तकरीबन थ्री नॉट थ्री के बराबर ही है। थ्री नॉट थ्री के चलन से बाहर होने के बाद उसकी जगह इंसास के अलावा रिवॉल्वर और पिस्टल दिए जाएंगे। जो ढोने और चलाने दोनों में ही सुविधाजनक हैं। 

चरणबद्ध तरीके से होगी विदाई 

उत्तराखंड से थ्री नॉट थ्री की विदाई चरणबद्ध तरीके से होगी। पहले शहरों की पुलिस से इसे वापस लिया जाएगा, उसके बाद देहात क्षेत्र के थानों से। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इसमें कुछ महीने का वक्त लग सकता है। 

थ्री नॉट थ्री रायफल का इतिहास 

थ्री नॉट थ्री का निर्माण 1880 में ब्रिटिश आर्मी के लिए किया गया था। इसके अचूक निशाने और बुलंद आवाज के बूते अंग्रेजों ने कई देशों पर अपनी बादशाहत कायम की। यह रायफल अंग्रेजी हुकूमत में वर्ष 1957 में भारतीय जवानों को मिली थी। तब इसकी नाल में बारूद भरकर रॉड से ठोंका जाता था। इसके बाद फायर किया जाता था। खूबियों को देखते हुए आजादी के बाद भी इसे हटाया नहीं गया। वर्ष 1962 में भारत ने इसी रायफल से चीन से युद्ध लड़ा था। सत्तर के दशक में इसे सेमी ऑटोमेटिक बनाया गया। इसमें मैग्जीन लगाकर छह फायर होने लगे। तब से यह पुलिस महकमे की शान बन गई। 

ये हैं विशेषताएं 

-1857 में पहली बार मिली थी 303 बोर की मसकट रायफल 

-70 के दशक में परिष्कृत कर बनाई गई बोल्ट एक्शन गन 

-इसकी मारक क्षमता 1600 गज से भी अधिक है। 

-इसकी गोली शरीर को छूते हुए भी निकल जाए काफी नुकसान पहुंचाती है। 

ये हैं खामियां 

-पुरानी होने की वजह से रायफल का पार्ट घिसने लगे। मरम्मत में दिक्कत आ रही थी। बाजार में पार्ट्स नहीं मिलते। 

-बोल्ट एक्शन वाली रायफल होने के कारण एक बार फायर करने के बाद रुकना पड़ता है। 

-दोनों हाथों का प्रयोग कर ही फायर किया जा सकता है। 

-फायर के समय पीछे की ओर झटका मारती है। 

पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है कि थ्री नॉट थ्री रायफल को चलन से बाहर करने की दिशा में कार्य आरंभ कर दिया गया है। इसकी जगह सभी पुलिस  कर्मियों को आवश्यकतानुसार इंसास रायफल, पिस्टल या फिर रिवॉल्वर दी जाएगी। 

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पुलिस सुधार के लिए कमेटी गठित 

पुलिस मुख्यालय ने पुलिस में सुधार और कल्याण की रूपरेखा तैयार करने के लिए कमेटी गठित कर दी है। आइजी मुख्यालय पुष्पक ज्योति की अगुआई में गठित कमेटी में यातायात निदेशक केवल खुराना, आइपीएस निवेदिता कुकरेती व ममता वोहरा भी हैं। यह कमेटी गृह मंत्रालय की ओर से जारी पुलिस सुधार के 50 बिंदुओं का अध्ययन कर पता लगाएगी कि उन्हें उत्तराखंड में किस तरह लागू किया जा सकता है। 

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इंसास रायफल की खूबियां 

-इससे सिंगल राउंड या तीन-राउंड मोड में भी फायर किया जा सकता है। 

-इस रायफल के साथ कई सारी चीजें अटैच की जा सकती हैं। 

-दूर तक देखने के लिए इसमें दूरबीन लगाई जा सकती है। इससे सैनिक का निशाना पहले से भी अच्छा हो जाता है। 

-4.15 किलोग्राम वजनी इंसास से 5.56 एमएम, एसएस 109 और एम 193 गोला-बारूद भी छोड़ा जा सकता है। 

-इंसास के आगे एक चाकू भी जोड़ा जा सकता है, जिससे दुश्मन के नजदीक होने पर हमला किया जा सके। 

-400 मीटर की रेंज वाली इंसास से ऑटोमैटिक मोड पर भी फायर किया जा सकता है। 

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