अंधेरी गलियों में भटक रहे युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर अंकुश की कसरत

देहरादून में नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर जो अव्यवस्था सामने आई थी उससे यह साफ हो गया था कि इन केंद्रों की निगरानी का लेकर कोई सिस्टम नहीं है। अब जाकर देहरादून में जिला प्रशासन ने मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) तैयार की है।

Sanjay PokhriyalWed, 24 Nov 2021 03:48 PM (IST)
छोटे-मोटे धंधे की आड़ में कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग नशे की सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं।

देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए सरकार गंभीरता से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को फिर साफ किया कि नशे के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए प्रदेश स्तर पर दल का गठन किया जा रहा है। इसके लिए पुलिस को निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही स्कूल-कालेज और धार्मिक स्थलों के आसपास नशा बेचने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार शिक्षण संस्थाओं के 100 मीटर के दायरे में नशे से संबंधित सामग्री नहीं बेची जा सकती। बावजूद इसके इस आदेश पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पा रहा है। स्कूल-कालेज के आसपास बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू से जुड़े अन्य उत्पाद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि नशीले पदार्थो के सौदागरों के लिए युवा सबसे आसान शिकार हैं। इसीलिए वे अपना जाल शिक्षण संस्थाओं के साथ ही हास्टल आदि के नजदीक फैला रहे हैं। इन स्थानों पर छोटे-मोटे धंधे की आड़ में कई अपराधी प्रवृत्ति के लोग नशे की सामग्री की आपूर्ति कर रहे हैं।

दरअसल, प्रदेश में आमतौर पर नशे की खेप पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब से पहुंच रही है। इसके अलावा नेपाल से भी नशे की सामग्री उत्तराखंड में प्रवेश कर रही है। ऐसा नहीं है कि पुलिस खामोश है। समय-समय पर अभियान चलाकर नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई कर गिरफ्तारियां की जाती हैं, लेकिन ये सिर्फ छोटी मछलियां ही हैं। बड़े मगरमच्छ कभी भी पुलिस के हाथ नहीं लगते। इस वर्ष की शुरुआत में पुलिस ने निर्णय लिया था कि एंटी ड्रग टास्क फोर्स को और मजबूत किया जाएगा।

तब कहा जा रहा था कि टीम को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाना है। इन निर्णयों पर अमल कहां तक पहुंचा, यह कहना मुश्किल है। इसके अलावा तस्करी में लिप्त अपराधियों की संपत्ति कुर्क कर गैंगस्टर लगाने का भी निर्णय लिया गया था। दूसरी ओर सरकार नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर भी गंभीर हुई है। देहरादून में नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर जो अव्यवस्था सामने आई थी, उससे यह साफ हो गया था कि इन केंद्रों की निगरानी का लेकर कोई सिस्टम नहीं है। अब जाकर देहरादून में जिला प्रशासन ने मानक प्रचालन कार्यविधि (एसओपी) तैयार की है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी नशा मुक्ति केंद्रों के लिए इस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिए। अंधेरी गलियों में भटक रहे युवाओं को रोशनी दिखाने की जिम्मेदारी समाज के सभी वर्गो की है।

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