उत्‍तराखंड में गुरुजी नहीं हैं सीएम पोर्टल को लेकर गंभीर, पढ़िए पूरी खबर

उत्‍तराखंड के शिक्षा विभाग की उदासीनता का ताजा उदाहरण खुद विभाग के निदेशक को खेद प्रकट करते हुए सामने रखना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 व केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और मानिटरिंग प्रणाली पर 776 शिकायतें लंबित पड़ी हैं।

Sunil NegiMon, 06 Dec 2021 07:55 PM (IST)
एक दिसंबर तक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 व केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और मानिटरिंग प्रणाली पर 776 शिकायतें लंबित पड़ी हैं।

जागरण संवाददाता, देहरादून। प्रदेश के शिक्षा महकमे की उदासीनता का ताजा उदाहरण खुद विभाग के निदेशक को खेद प्रकट करते हुए सामने रखना पड़ रहा है। एक दिसंबर तक मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905 व केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और मानिटरिंग प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) पर 776 शिकायतें लंबित पड़ी हैं।

प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा एसपी खाली ने बुधवार को समस्त जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को इस आशय का पत्र भेजा। जिलेवार सीएम हेल्पलाइन की 310 व केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और मानिटरिंग प्रणाली (सीपीजीआरएएमए) में 466 लंबित शिकायतों की जानकारी दी। प्रभारी निदेशक ने यह भी बताया कि लंबित शिकायतें निचले स्तर एल-वन एवं एल-टू में ज्यादा दिनों से लंबित हैं, जिसका निस्तारण भी इसी स्तर से होना है। कहा कि निदेशालय की ओर से बार-बार एल-वन एवं एल-टू को निर्देशित भी किया गया, लेकिन उनके कार्य में सुधार नहीं आया जो अत्यन्त खेद का विषय है। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी त्वरित कार्रवाई करते हुए सीएम हेल्पलाइन व केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और मानिटरिंग प्रणाली पर ध्यान दें।

विदित रहे कि विद्यालयी शिक्षा विभाग ने प्रदेश के दूर दराज के स्कूलों एवं विद्यालयों को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जोड़ा हुआ है ताकि ग्रामीण क्षेत्र के आमजन से लेकर वहां पढ़ने वाले बच्चे को यदि कोई दिक्कतें आती हैं और उनका समय पर समाधान नहीं होता है तो ऐसे में वह मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत कर सकता है। पिछले दो महीने में ही मुख्यमंत्री के दो पोर्टलों में सात सौ से भी अधिक शिकायत प्राप्त हुई, लेकिन उनमें से बहुत कम शिकायतों पर संबंधित ब्लाक व जिला शिक्षा विभाग ने गौर फरमाया हो। जब लंबे समय तक शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है तो फिर विद्यालयी शिक्षा निदेशक को सभी जिला के मुख्य शिक्षा अधिकारी को कड़े संदेश के साथ यह पत्र भेजना पड़ा है।

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