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नई शिक्षा नीति लागू करने को बनेगी टास्क फोर्स

नई शिक्षा नीति लागू करने को बनेगी टास्क फोर्स
Publish Date:Tue, 11 Aug 2020 10:04 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, देहरादून: प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने मंगलवार को यह घोषणा की। वह ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में स्थापित केंद्रीय स्टूडियो से नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे।

शिक्षा मंत्री ने वर्चुअल क्लास के माध्यम से प्रदेशभर के अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि राज्य स्तरीय टास्क फोर्स में शिक्षा जगत से जुड़े व्यक्तियों के साथ ही शिक्षक, शिक्षाविद, जनप्रतिनिधि और निजी विद्यालयों व विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टास्क फोर्स नई शिक्षा नीति का व्यापक अध्ययन करने के बाद राज्य में इसे लागू करने के लिए सरकार को अपने सुझाव देगी। नीति में शामिल विद्यालयी शिक्षा से संबंधित आठ विषयों पर विभागीय कार्यदल गठित किए जाएंगे। ये कार्यदल राज्य के परिपेक्ष्य में प्रत्येक विषय पर अपने सुझाव निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण को देंगे। शिक्षा विभाग और निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण इन सुझावों के आधार पर नीति के क्रियान्वयन को सुझावात्मक मार्गदर्शिका तैयार करेंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले विद्यालयी शिक्षा के सभी अधिकारियों, प्रधानाचार्यो, शिक्षकों, अभिभावकों और शिक्षाविदों से संवाद स्थापित कर एक व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी। जिसे कैबिनेट में रखा जाएगा।

निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने कहा कि शिक्षा नीति में दिए गए प्रविधानों को राज्य की जरूरत के मुताबिक लागू करने के लिए इस तरह रायशुमारी करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि विभिन्न जनपदों से सुझाव प्राप्त हो गए हैं। विश्लेषण कर शीघ्र ही इन्हें शासन को उपलब्ध कराया जाएगा। इस दौरान एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक कुलदीप गैरोला ने नई शिक्षा नीति के प्रमुख बिंदुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। बैठक में संस्कृत निदेशक शिव प्रसाद खाली, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा रामकृष्ण उनियाल, अपर निदेशक प्राथमिक शिक्षा वीरेंद्र सिंह रावत, अपर निदेशक गढ़वाल मंडल महावीर सिंह बिष्ट, अपर परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा डॉ. मुकुल सती, अपर निदेशक कुमाऊं मंडल राघुनाथ लाल आर्य, अपर निदेशक सीमैट शशि चौधरी, अपर निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार नौडियाल, सीमैट के विभागाध्यक्ष दिनेश प्रसाद गौड़ आदि उपस्थित रहे। आंगनबाड़ी केंद्रों की होगी मैपिंग

निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण ने कहा कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए आइसीडीएस के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग की जाएगी। प्राथमिक स्तर पर बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान के लिए राज्य में पूर्व से संचालित अर्ली लैंग्वेज अर्ली मैथमेटिक्स कार्यक्रम को इस वर्ष 3340 विद्यालयों में विस्तारित किया जाएगा। अगले साल इसे समस्त विद्यालयों में लागू किया जाएगा। ये आए सुझाव

-स्कूल कांप्लेक्स के लिए तय परिधि में पहाड़ी क्षेत्रों के लिए छूट।

-संस्कृत विद्यालयों में भी प्रवेशिका कक्षाओं को ईसीसीई केंद्रों से जोड़ा जाए।

-शासकीय व अशासकीय विद्यालयों में एक समान नीति।

-विद्यालयों में भौतिक संसाधनों व अध्यापकों की चरणबद्ध ढंग से पूíत।

-ड्रॉपआउट छात्रों का चिह्नीकरण।

-छात्र नामांकन आधार कार्ड से लिंक कर यूनिक आइडी का आवंटन।

-चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को डायट व एससीईआरटी में किसी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय के साथ समन्वित रूप से लागू करना।

-सीमित स्थानांतरण और प्रदर्शन के अनुसार पदोन्नति व वेतन वृद्धि।

-नैतिक शिक्षा कार्यक्रम का अनिवार्य संचालन।

-छात्र-शिक्षक अनुपात का पूर्णतया पालन।

-कला, संगीत व खेल को कोर करिकुलम का हिस्सा बनाएं।

-एनसीसी व आपदा प्रबंधन जैसे विषय कक्षा नौ के बाद अनिवार्य किए जाएं।

-प्री-प्राइमरी के शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान में भी डिप्लोमा दिया जाए।

-केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर पीआरटी, पीजीटी एवं टीजीटी कैडर लागू किया जाए।

-हर गाव में एक लाइब्रेरी की स्थापना।

-कौशल विकास को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।

-राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की तर्ज पर स्टेट ओपन स्कूल की स्थापना।

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