बोर्ड परीक्षाएं स्थगित होते ही घर लौटने लगे आवासीय स्कूलों के छात्र, जानें- किस स्कूल में क्या स्थिति

बोर्ड परीक्षाएं स्थगित होते ही घर लौटने लगे आवासीय स्कूलों के छात्र।

दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित होने की घोषणा के साथ ही देहरादून के निजी आवासीय स्कूलों के छात्रों ने घर का रुख करना शुरू कर दिया है। वहीं 12 वीं के छात्रों का घर लौटने का सिलसिला जारी है।

Raksha PanthriMon, 19 Apr 2021 02:10 PM (IST)

 जागरण संवाददाता, देहरादून। दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं स्थगित होने की घोषणा के साथ ही देहरादून के निजी आवासीय स्कूलों के छात्रों ने घर का रुख करना शुरू कर दिया है। वहीं 12 वीं के छात्रों का घर लौटने का सिलसिला जारी है। हालांकि, कुछ स्कूलों ने 12वीं के छात्रों को प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए अभी रोका हुआ है।

कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने शिक्षा व्यवस्था को पिछले साल वाले हालात में दोबारा लाकर खड़ा कर दिया है। सीबीएसई और राज्य बोर्ड ने 10वीं के छात्रों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। वहीं 12वीं की परीक्षा पर जून के पहले हफ्ते में स्थिति का जायजा लेने के बाद फैसला लेने का फैसला किया है। सीआइसीएसई ने 10वीं के छात्रों को परीक्षा देने का विकल्प देना भी तय किया है। 

किस स्कूल में क्या है स्थिति

दून के ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय सीबीएसई से संबद्ध है। यहां दसवीं कक्षा के 90 फीसद छात्र घर जा चुके हैं। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. मीना काला ने बताया कि 10वीं की परीक्षाएं रद होने का फैसला आने के बाद से 10वीं के 90 फीसद से ज्यादा छात्र घर जा चुके हैं। अब केवल 12वीं के छात्र ही स्कूल में रह गए हैं। इन छात्रों को घर भेजा जाए या नहीं, इसपर शिक्षा विभाग से निर्देश मांगे गए हैं। 

वेल्हम ब्वॉयज स्कूल की मीडिया प्रभारी मोनिका ने बताया कि बोर्ड की परीक्षाएं स्थगित होने के बाद से छात्रों को घर जाने की इजाजत दे दी है। वेल्हम गर्ल्स स्कूल में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद ही स्कूल बंद कर दिया गया है। द दून स्कूल ने भी बच्चों को घर जाने की छूट दे दी है। एशियन स्कूल की प्रधानाचार्य रुचि प्रधान दत्ता ने बताया कि 10वीं के बोर्डिंग के ज्यादातर छात्रों को घर भेजा जा चुका है। 12वीं के छात्रों को प्रायोगिक परीक्षा तक ही रोका जाएगा। 

प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप का कहना है कि परीक्षाएं निरस्त करना कोई अंतिम विकल्प नहीं है। बिना परीक्षा के छात्रों का आकलन कैसे किया जाएगा। करीब एक साल बाद किसी तरह स्कूल खुल पाए थे। छात्रों की पढ़ाई सुचारू रूप से चलने लगी थी। अब दोबारा सब स्कूल बंद कर छात्रों को नियमित पढ़ाई से दूर कर दिया गया है। 

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