चावल से हट सकता है मंडी शुल्क व विकास सेस

राज्य ब्यूरो, देहरादून: उत्तराखंड की मंडियों में चावल पर लिया जाने वाला ढाई फीसद मंडी शुल्क व विकास सेस हट सकता सकता है। कुमाऊं-गढ़वाल चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज और सिडकुल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान इस संबंध में आए सुझाव का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि फैक्ट्री एक्ट के तहत हर साल 10 प्रतिशत फीस वृद्धि में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।

चावल, मंडी समिति की अनुसूची में शामिल है और मंडियों में आने वाले चावल पर दो फीसद मंडी शुल्क व आधा फीसद विकास सेस लिया जाता है। उद्यमियों की ओर से इन दोनों से छूट देने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। मंगलवार को कुमाऊं-गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और सिडकुल वर्कर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भी यह मसला रखा।

इस दौरान अन्य कई मसलों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंहनगर में औद्योगिक आस्थानों में कार्य करने वाले कर्मियों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के मद्देनजर 32 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा संविदा पर कार्यरत डॉक्टरों को भी हटाया नहीं गया है। रुद्रपुर में सौ बेड के अस्पताल का निर्माण चल रहा है। यही नहीं, फैक्ट्री एक्ट में हर साल 10 फीसद फीस वृद्धि में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने राजकीय औद्योगिक आस्थानों में शेड व भूखंडों के किराया एवं स्थानांतरण प्रक्रिया को सरल व लेवी रहित बनाने के सुझाव का परीक्षण कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। साथ ही वर्ष 1988 से वित्तीय वर्ष 2016-17 तक के वैट की बकाया राशि के समापन एवं ब्याज अथवा अर्थदंड माफी योजना लाने के संबंध में उद्यमियों से सुझाव मांगे। उन्होंने काशीपुर के महुआखेड़ागंज में एमपीडीजी मार्ग से अरहरपुर-कटैया मार्ग के निर्माण के निर्देश लोनिवि को दिए। इस मौके पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और प्रमुख सचिव मनीषा पंवार भी उपस्थित थे।

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