इस मामले में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, जानिए

देहरादून, [रविंद्र बड़थ्वाल]: निजी मेडिकल कॉलेजों, व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में शुल्क निर्धारण को गठित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। साथ ही इन दोनों ही संस्थाओं में अध्यक्ष के रूप में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार खुद नहीं कर सकेगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार को झटका देते हुए एसएलपी को ही खारिज कर दिया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सरकार को निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण को ढांचा भी तैयार करना पड़ेगा।

हाईकोर्ट बीते जून माह में ही निजी शिक्षण संस्थानों के लिए फीस तय करने को गठित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर सरकार की ओर से की गई हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति को रद कर चुका है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड अनानुदानित निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाएं (प्रवेश एवं शुल्क नियामक) एक्ट, 2006 में वर्ष 2010 में संशोधन किया था। संशोधन के बाद उक्त एक्ट के मुताबिक प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार सरकार को मिल गया था।

इससे पहले एक्ट में यह अधिकार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास था। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश से पहले ही प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष पद से जस्टिस गुरमीत राम इस्तीफा दे चुके थे। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर अपीलीय प्राधिकरण के अध्यक्ष पद से जस्टिस बृजेश कुमार श्रीवास्तव भी हट गए थे। बाद में अध्यक्ष की गैर मौजूदगी में अपीलीय प्राधिकरण ने नामित सदस्यों में से ही कोरम पूरा करने के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस को लेकर फैसला भी सुनाया। सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी।

बीती सात सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की एसएलपी को ही खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से प्रदेश में एक बार फिर हाईकोर्ट का आदेश प्रभावी हो गया। इस आदेश के मुताबिक अब प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति और अपीलीय प्राधिकरण में अध्यक्ष की नियुक्ति हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही करेंगे। साथ ही प्रदेश सरकार को तीन माह में निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण को लेकर नया ढांचा खड़ा करने के आदेश दिए थे। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा डॉ रणवीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज होने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सरकार अब हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन करेगी।

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