शासन में पहुंचा शिक्षकों की वरिष्ठता का विवाद

राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश में पहले शिक्षकों की पदोन्नति और अब राजकीय माध्यमिक शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने का मामला फिलहाल लटक गया है। तदर्थ विनियमित शिक्षकों को तदर्थ रहने की अवधि से वरिष्ठता दिए जाने का मामला लोक सेवा ट्रिब्यूनल में जाने के बाद ये हालात बने हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने उक्त संबंध में पत्र शासन को भेजा है। शासन वरिष्ठता के इस विवाद पर मंथन कर रहा है।

तदर्थ विनियमित शिक्षकों को हाईकोर्ट ने एक अक्टूबर 1990 से विनियमित मानते हुए वरिष्ठता निर्धारित करने के आदेश दिए हैं। उत्तरप्रदेश में तदर्थ शिक्षकों को वर्ष 1995 में विनियमित किया गया था। उत्तराखंड में कार्यरत शिक्षकों को 1999 और फिर 2002 में विनियमित किया गया। तदर्थ से विनियमित हुए ये शिक्षक 1990 से वरिष्ठता देने को लेकर हाईकोर्ट में गए थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीधी भर्ती से नियुक्त हुए शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होना तकरीबन तय हो गया है।

सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों की ओर से इस मामले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई है। ट्रिब्यूनल से स्टे मिलने के बाद शिक्षकों की वरिष्ठता का मसला लटक गया है। उक्त मामले में अब तदर्थ विनियमित और सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों में रार बढ़ गई है। दोनों एकदूसरे के आमने-सामने हो गए हैं। विवाद बढ़ने के बाद अब शिक्षकों की वरिष्ठता पर तलवार लटक गई है। गौरतलब है कि पहले अदालत में एक मामले के विचाराधीन होने के चलते शिक्षकों की पदोन्नति पर रोक लगी हुई है। अब वरिष्ठता सूची भी इस दायरे में आ गई है। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने इस प्रकरण पर शासन को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है। शासन इस पर मंथन में जुटा है। फिलहाल ट्रिब्यूनल के अगले कदम का भी इंतजार किया जा रहा है।

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