साहिया के पास कैंप कार्यालय के लिए एसडीआरएफ ने देखी जगह

एसडीआरएफ के सहायक सेना नायक कमल सिंह पंवार ने साहिया के पास हईया में जगह का निरीक्षण किया। कमल सिंह पंवार ने कहा कि कालसी से लेकर त्यूणी तक आपदा क्षेत्र हैं। साहिया आसपास अगर जगह मिल जाती हैं तो एसडीआरएफ का कैंप कार्यालय भी हम साहिया में ही खोलेंगे।

Sunil NegiFri, 25 Jun 2021 03:51 PM (IST)
साहिया के पास कैंप कार्यालय के लिए एसडीआरएफ ने देखी जगह।

जागरण संवाददाता, विकासनगर। एसडीआरएफ के सहायक सेना नायक कमल सिंह पंवार ने आज शुक्रवार को साहिया के पास हईया में जगह का निरीक्षण किया। कमल सिंह पंवार ने कहा कि कालसी से लेकर त्यूणी तक आपदा ग्रस्थ क्षेत्र हैं। साहिया आसपास अगर जगह मिल जाती हैं, तो एसडीआरएफ का कैंप कार्यालय भी हम साहिया में ही खोलेंगे और संसाधन की कमी भी नहीं रहेगी और सिपाही भी रख सकते हैं।

अभी एसडीआरएफ के पास अपनी जगह नहीं है। अभी टीम चकराता में है, वहां पर सर्दी का समय होता है तो चकराता त्यूणी मार्ग बर्फ के कारण बंद रहता है। इसलिए त्यूणी जाने के लिए साहिया होकर क्वानूं से जाना पड़ता है। अगर साहिया जगह मिलती है तो पूरे जौनसार बावर के हर क्षेत्र में जाने के लिए सुविधा रहेगी। कालसी चकराता के बीच साहिया बाजार है। करीब 200 गांवों का केंद्र बिंदु साहिया है। क्षेत्र में जब दुर्घटना होती है तो साहिया से हर जगह जाने के लिए सुविधा होगी। हईया अलसी मोटर मार्ग पर जगह का निरीक्षण किया गया, जिसकी जमीन है उससे भी संपर्क साधा जाएगा। अगर साहिया कार्यालय खुल गया एसडीआरएफ के अभी संसाधन साहिया में रखे जाएंगे। इस अवसर पर सहायक सेना नायक कमल सिंह पंवार, टीम प्रभारी योगेंद्र भंडारी, पटवारी सुखदेव जिन्नाटा, कमलेश शर्मा, सिपाही विकेश कुमार, दिनेश चौहान, धजवीर चौहान आदि उपस्थित थे।

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एलआइसी ने 35 मिनट में किया क्लेम का भुगतान

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) ने क्लेम का भुगतान रिकार्ड 35 मिनट में करने का दावा किया है। एलआइसी की ऋषिकेश शाखा ने तीन पालिसी धारकों की मृत्यु होने पर दावे का भुगतान तुरंत कर दिया।

एलआइसी के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक पुनीत कुमार के अनुसार, देहरादून मंडल की नगर शाखा-3 ने पालिसी धारक की मृत्यु दावे की सूचना मिलने के एक घंटे के भीतर भुगतान राशि नामित के खाते में जमा कराई। ऋषिकेश शाखा ने 35 मिनट में मृत्यु दावे का भुगतान किया। कोरोना काल में अधिकृत मृत्यु प्रमाण पत्र की जगह अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र व अंतिम संस्कार के दस्तावेज के आधार पर भी दावों का निस्तारण किया जा रहा है।

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