जो छात्र कभी थे ही नहीं, उनके भी खुलवा दिए गए खाते

देहरादून, जेएनएन। छात्रवृत्ति घोटाले में रोज नई परतें खुल रही हैं। मामले की जांच कर रही एसआइटी को प्रमाण मिले हैं कि जो छात्र कभी थे ही नहीं, उनके भी खाते बैंकों में खुलवाए गए और छात्रवृत्ति की रकम हड़प ली गई। सूत्रों का कहना है कि एसआइटी घोटालेबाजों के लगभग करीब पहुंच गई है। प्रमाणों का परीक्षण होते ही गिरफ्तारियां भी शुरू हो जाएंगी। 11 फरवरी को हाईकोर्ट में इसकी रिपोर्ट देनी है। ऐसे में आरोपितों के खिलाफ पहले ही बड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद है। इस मामले में कुछ और मुकदमे भी दर्ज किए जाने हैं। इस आधार पर कॉलेज संचालक और फर्जी नामों से खाता खोलने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा। 

समाज कल्याण विभाग में वर्ष 2011-12 से 2016-17 तक दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में करोड़ों का घपला सामने आया है। करीब पांच साल तक प्रदेश के तीन सौ से ज्यादा संस्थानों में पढ़ने वाले एससी, एसटी और ओबीसी के छात्र-छात्राओं के नाम पर फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति बांटने का आरोप है। इसके लिए तय मानकों का दरकिनार करते हुए घोटालेबाजों ने छात्र-छात्राओं के फर्जी नाम और फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़प ली। सरकारी और प्राइवेट इंटर कॉलेज, पीजी कॉलेज, मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज, बीएड कॉलेज समेत अन्य प्रोफेशनल कॉलेजों में यह खेल हुआ है।

अकेले दून और हरिद्वार में 120 कॉलेजों के नाम अभी तक सामने आ चुके हैं। कॉलेजों के खिलाफ एसआइटी ने पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं। इसी आधार पर एसआइटी ने मुकदमे भी दर्ज किए हैं। एसआइटी सूत्रों का कहना है कि मुख्य घोटालेबाज और उनके लिंक खंगाले जा रहे हैं। इसी माह के अंत तक एसआइटी आरोपितों की गिरफ्तारी की तैयारी में हैं। हरिद्वार जिले में दर्ज हुए मुकदमे में सबसे पहले गिरफ्तारी होगी। 

11 जिलों तक नहीं पहुंची जांच 

हाईकोर्ट ने एसआइटी को हरिद्वार और दून के अलावा प्रदेशभर में हुए छात्रवृत्ति के घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन एसआइटी अभी तक सिर्फ दून और हरिद्वार की जांच तक सीमित है। ऐसे में यदि एसआइटी ने ऊधमसिंहनगर, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी आदि के कॉलेज और अन्य संस्थानों की जांच की तो बड़े घपले सामने आ सकते हैं। 

मामला दबाने का प्रयास 

छात्रवृत्ति घोटाले में समाज कल्याण, आइएएस, पीसीएस अफसरों के अलावा प्राइवेट कॉलेजों के संचालकों पर गाज गिरनी तय है। ऐसे में पूरा गिरोह इन दिनों मुख्यमंत्री आवास से लेकर बड़े नेताओं के संपर्क में है। इस मामले को रफा-दफा करने के लिए घोटालेबाज अपने-अपने स्तर पर दबाव बनाने में जुट गए हैं। हालांकि सरकार की तरफ से साफ इशारा है कि जीरो टॉलरेंस पर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर ही एसआइटी गठित हुई है। ऐसे में घोटालेबाजों की मुश्किलें कम होंगी, इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं। 

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