पहले इलाज के लिए अस्‍पताल में कतार, फिर मोक्ष को इंतजार

रायपुर स्पोट्र्स कॉलेज के समीप बने कोविड श्‍मशान घाट में चलती चिताएं।

कोरोना की दूसरी लहर में इंतजार शब्द मानो संक्रमितों की नियति बन गया है। अस्पताल में संक्रमित एक अदद बेड के लिए प्रतीक्षा करने को मजबूर हैं तो श्मशान घाट में संक्रमितों की मृत देह को मोक्ष के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

Sunil NegiFri, 23 Apr 2021 08:08 AM (IST)

आयुष शर्मा, देहरादून। कोरोना की दूसरी लहर में इंतजार शब्द मानो संक्रमितों की नियति बन गया है। अस्पताल में संक्रमित एक अदद बेड के लिए प्रतीक्षा करने को मजबूर हैं तो श्मशान घाट में संक्रमितों की मृत देह को मोक्ष के लिए अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। दून में रायपुर स्थित कोविड श्मशान घाट में गुरुवार को भी 20 से ज्यादा कोरोना संक्रमितों की मृत देह का अंतिम संस्कार हुआ। आलम यह था कि एक चिता की आग ठंडी होने से पहले ही दूसरी चिता सुलगनी शुरू हो जाती। वातावरण में सुबह से देर शाम तक मृतकों के स्वजनों की दर्द भरी चीख-पुकार गूंजती रही। 

देहरादून में कोरोना वायरस का संक्रमण दिनोंदिन घातक होता जा रहा है। मरीजों की संख्या के साथ इस महामारी से मौत के आंकड़े भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसका असर कोविड श्मशान घाट पर भी दिख रहा है। कोरोना से बुरी तरह प्रभावित वाराणसी, लखनऊ, दिल्ली, भोपाल समेत देश के अन्य शहरों के श्मशान घाटों में दिख रहे मंजर की शुरुआती झलक यहां भी नजर आने लगी है। हालांकि, अभी हालात इतने नहीं बिगड़े हैं कि स्वजनों को अंतिम संस्कार के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ रहा हो। कोविड श्मशान घाट में सुबह नौ बजे से ही मृत देहों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है।

सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही घाट का तापमान भी बढ़ने लगता है। दोपहर में 12 से ढाई बजे के बीच यहां भीड़ अधिकतम होती है। गुरुवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे यहां कोरोना के कारण काल कवलित हुए 11 मरीजों की चिता एक साथ जल रही थी। श्मशान घाट परिसर में मृतकों के स्वजन भारी संख्या में मौजूद थे। अपनों को खोने के गम में रोने-बिलखने की आवाजें शांत नहीं हो रही थीं। मृत देहों को जलाने के लिए लकड़ी मुहैया कराने वाले मोहित ने बताया कि यह सिलसिला शाम तक चलता रहता है। 

मोहित के अनुसार, कुछ दिन पहले तक श्मशान घाट में एक या दो मृत देह ही अंतिम संस्कार के लिए आ रही थीं। अब हर दिन यह संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को दिनभर में 27 मृत देह श्मशान पहुंचीं। श्मशान घाट में एक बार में 11 चिता जलाने की जगह है। एक मृत देह को जलने में छह से सात घंटे लग जाते हैं। इस दौरान दूसरी मृत देह पहुंचने पर स्वजनों को उसके अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग पीपीई किट पहनकर श्मशान घाट आ रहे हैं और कुछ बिना पीपीई किट के। 

मृत देह को हाथ नहीं लगा रहे स्वजन

कोरोना के खौफ में लोग मृत्यु के बाद भी अपनों से दूरी बनाए रखने को मजबूर हैं। वह मृत देह को पीपीई किट से बाहर निकालने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। श्मशान घाट पर व्यवस्था में लगे लोग ही संक्रमितों की मृत देह को पीपीई किट से बाहर निकालकर चिता पर रखते हैं। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पीपीई किट पहनकर खुद ही अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया कर रहे हैं। 

दो लोग के भरोसे पूरा श्मशान घाट

कोविड श्मशान घाट सिर्फ दो कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। एक चिता के लिए लकड़ी उपलब्ध करवाने वाली एजेंसी के कर्मचारी मोहित और दूसरा कर्मचारी चिता तैयार कर बाकी की प्रक्रिया संपन्न कराता है। ऐसे में दबाव बढ़ने पर यहां व्यवस्था चरमराना तय है। निगरानी और मदद के लिए जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग का कोई कर्मचारी-अधिकारी भी यहां मौजूद नहीं रहता। यहां मृत देह के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया के लिए 5000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कुछ लोग इस पर आपत्ति भी जताते हैं, मगर मजबूरी में उन्हें मुंह मांगी धनराशि देनी पड़ती है। वहीं, श्मशान घाट के बाहर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर रहे हैं।

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