निजी स्कूलों ने शिक्षक और प्रधानाचार्य को स्कूल बुलाने की मांगी अनुमति, जानिए वजह

निजी स्कूलों ने शिक्षक और प्रधानाचार्य को स्कूल बुलाने की मांगी अनुमति।

दून के निजी स्कूलों ने दसवीं का परिणाम तैयार करने के लिए स्कूल खोलने की छूट मांगी। साथ ही प्रधानाचार्य और सात शिक्षकों को स्कूल बुलाने की अनुमति मांगी है। पीपीएसए ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर यह व्यवस्था लागू करवाने के लिए सोमवार से ही स्कूल खोलने की छूट मांगी।

Raksha PanthriSun, 09 May 2021 03:04 PM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। देहरादून के निजी स्कूलों ने दसवीं का परिणाम तैयार करने के लिए स्कूल खोलने की छूट मांगी है। साथ ही प्रधानाचार्य और सात शिक्षकों को स्कूल बुलाने की अनुमति मांगी है। प्रिंसिपल्स प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन (पीपीएसए) ने शनिवार को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर यह व्यवस्था लागू करवाने के लिए सोमवार से ही स्कूल खोलने की छूट मांगी है।

पीपीएसए के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहा कि सीबीएसई और सीआइसीएसई ने दसवीं की परीक्षाएं रद कर दी हैं। स्कूलों की ओर से आयोजित आंतरिक परीक्षाएं, यूनिट टेस्ट प्रोजेक्ट आदि के आधार पर बच्चों की ग्रेडिंग की जानी है। इसके लिए इन परीक्षाओं के ग्रेड कार्ड बोर्ड को भेजने हैं। ग्रेड देने के लिए सभी स्कूलों को प्रधानाचार्य, स्कूल के पांच मुख्य विषयों के शिक्षक और दूसरे स्कूल के दो शिक्षकों की एक रिजल्ट कमेटी बनाने के निर्देश बोर्ड ने दिए हैं। 

मगर कोरोना के चलते स्कूल पूरी तरह बंद हैं, जिस कारण परिणाम तैयार करने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में हर स्कूल के प्रिंसिपल और सात शिक्षकों को स्कूल जाने की अनुमति जिला प्रशासन से मांगी है। ताकि ये काम समय पर और सही तरीके से निपटाकर अंक और ग्रेड बोर्ड को भेजे जा सकें। ऐसा नहीं होता है तो बच्चों के परिणाम आने में देरी हो जाएगी। 

एनआइओएस ने छात्रों को कोचिंग संस्थानों के प्रति सतर्क किया

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) ने छात्र और अभिभावकों से किसी भी अप्राधिकृत एजेंसियों और कोचिंग संस्थाओं के झांसे में न आने को कहा है। संस्थान के मुताबिक कई कोचिंग संस्थानों में छात्रों से एनआइओएस के नाम पर पैसा वसूल लिया है। संस्थान ने मार्च-अप्रैल की माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक कक्षा की परीक्षा फीस विलंब शुल्क के साथ ऑनलाइन माध्यम से करवाने का मौका भी दिया है। यह परीक्षा जून के होने की संभावना है।

एनआइओएस के क्षेत्रीय निदेशक हरदीप सिंह ने बताया कि संस्थान के सामने ऐसे कई मामले आए हैं जिनमें अप्राधिकृत एजेंसी और कोचिंग संस्थानों ने छात्रों से अत्याधिक शुल्क लेकर धोखा दिया है, जबकि एनआइओएस का इससे कोई संबंध नहीं है। संस्थान ने प्रवेश और एक्रिडिटेशन आदि के लिए किसी एजेंसी या कोचिंग संस्था को नहीं लगाया है।

न किसी उपयुक्त संस्थाओं को प्राधिकृत किया है। बताया कि जिन छात्रों की माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक की परीक्षा होनी है और जो समय से फीस नहीं भर सकें हैं। वे 15 मई तक परीक्षा शुल्क के साथ विलंब शुल्क 1500 रुपये तक जमा करा सकते हैं। छात्र एनआईओएस की वेबसाइट www.nios.ac.in पर ऑनलाइन फीस जमा करा सकते हैं।

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