प्राइवेट लैब संचालकों ने डेंगू टेस्ट के रेट कम करने से किए हाथ खड़े

देहरादून, जेएनएन। डेंगू की एलाइजा जांच को लेकर प्राइवेट लैब संचालक अपनी बात से पलट गए हैं। रविवार को पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने तय किया था कि एलाइजा जांच के एक हजार की जगह अब 500 रुपये लिए जाएंगे। इस पर अधिकतर पैथोलाजिस्ट ने 500 रुपये में जांच करने से इनकार कर दिया है। इसके पीछे खर्चे को वजह बताया है। इस पर अब एलाइजा जांच 800 रुपये में करने पर सहमति बनी है।

राजधानी में डेंगू को लेकर हाहाकार मचा है। अकेले दून में 1866 मरीज अब तक डेंगू की चपेट में आ चुके हैं। ये वो मरीज हैं जो सरकारी अस्पतालों में जांच करा चुके हैं या क्रास एग्जामिनेशन के लिये सैंपल सरकारी अस्पताल में भेजा गया है। प्राइवेट लैब का कोई भी डाटा स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है। उस पर प्राइवेट लैब अपनी मनमानी पर उतारू हैं। 

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश के बाद स्वास्थ्य महकमे ने प्राइवेट लैब एसोसिएशन को डेंगू से संबधित जांचों को कम रेट पर करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद रविवार को प्राइवेट लैब एसोसिएशन ने जांच के लिए शुल्क निर्धारित कर दिए। बताया गया कि एलाइजा जांच के एक हजार की जगह अब 500 रुपये ही लिए जाएंगे। 

एक दिन बाद ही इसे लेकर विवाद की स्थिति बन गई। कुछ सदस्यों का कहना था कि तमाम खर्चों को देखते हुए इतने कम दाम पर एलाइजा जांच कर पाना मुमकिन नहीं है। क्वालिटी कंट्रोल का तर्क भी उन्होंने दिया। बहरहाल, अब एसोसिएशन ने डीजी हेल्थ को अपने निर्णय से अवगत करा दिया है। पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सविता गोयल ने कहा कि एलाइजा जांच 800 रुपये से कम में नहीं हो सकती है, इससे जांच की क्वालिटी पर फर्क पड़ सकता है। अन्य शुल्क यथावत रहेंगे।

शहर में कई अनाधिकृत लैब 

शहर में कई निजी लैब अनाधिकृत रूप से चल रहे हैं। पैथोलॉजी एसोसिएशन के अंर्तगत 46 रजिस्टर्ड पैथोलॉजिस्ट हैं। वहीं, शहर में दर्जनों पैथोलॉजी लैब खुल गए हैं। स्थिति ये कि एक पैथोलाजिस्ट के नाम पर कई-कई लैब चल रहे हैं। इन लैब में न क्वालिटी और न शुल्क पर कोई नियंत्रण है। 

पैथोलॉजिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. सविता गोयल ने कहा कि डीजी हेल्थ को ऐसे सभी लैब की सूची दी जा रही है। कहा कि एक पैथोलाजिस्ट को अधिकतम दो लैब में सेवा देने की बाध्यता होनी चाहिए। डॉ. गोयल ने बताया कि सभी लैब पर स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी कर कार्रवाई करने की बात कही है।

जीएसटी की छूट मिले

पैथोलाजिस्ट एसोसिएशन ने डेंगू व हेमेटोलॉजी किट पर जीएसटी में छूट की मांग की है। उनका कहना है कि मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए छूट प्रदान की जाए।

डेंगू नियंत्रण के लिए दूरभाष नंबर जारी

डेंगू जब विकराल हुआ तब जाकर तंत्र भी तेजी से हाथ-पैर मारने लगा है। डेंगू की बीमारी पर नियंत्रण के लिए अब नगर निगम में एक दूरभाष नंबर भी जारी किया गया है। स्वास्थ्य सचिव नितेश झा व नगर आयुक्त विनय कुमार शंकर पांडेय के निर्देश पर नगर निगम प्रशासन ने सोमवार को दूरभाष नंबर 0135-2652571 डेंगू नियंत्रण के लिए जारी किया है। 

लोग इस नंबर पर संपर्क कर अपने क्षेत्रों में फॉगिंग/ स्प्रे करने की मांग निगम प्रशासन से कर सकते हैं। इसके अलावा पुलिस के 112 टोल फ्री नंबर पर भी डेंगू से संबंधित मामले की शिकायत की जा सकती है। 

निजी लैब में भी जांच को सैंपल भेजेगी सरकार

प्रदेश में डेंगू के संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य महकमा इनके सैंपल की जांच के लिए निजी लैब का सहारा लेने जा रही है। इसके लिए निजी लैब को सरकार द्वारा तय शुल्क ही दिया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि निजी लैब से केवल एलाइजा टेस्ट ही मान्य होंगे। वहीं, निजी लैब संचालकों ने यह कहा है कि मरीज के सीधे लैब पर आने पर लैब द्वारा तय शुल्क ही लिया जाएगा।

प्रदेश में डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। फिलहाल पांच सरकारी अस्पतालों में डेंगू के संदिग्धों के खून की जांच की जा रही है। यहां, प्रतिदिन 2000 जांच की जा सकती हैं। बावजूद इसके स्थिति यह है कि मरीजों को वेटिंग में नंबर लगाना पड़ रहा है। 

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इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य महकमे ने निजी लैब से भी समन्वय का निर्णय लिया है। सोमवार को इस संबंध में सचिव स्वास्थ्य नितेश झा के साथ निजी लैब संचालकों की एक बैठक भी हुई। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सरकार निजी लैब में 100 सैंपल भेजेगी, जिनका सरकारी दरों पर ही टेस्ट किया जाएगा। 

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इस दौरान लैब संचालकों द्वारा अधिक शुल्क वसूले जाने के संबंध में भी चर्चा की गई। सचिव स्वास्थ्य नितेश झा ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में अधिक सैंपल आने की स्थिति में ही जांच के लिए सैंपल निजी लैब को भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट किया गया है कि लैब इसका एलाइजा टेस्ट करेंगे। रैपिड टेस्ट को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं, कारण यह कि इसके तकरीबन 80 प्रतिशत अंतिम परिणाम सही नहीं पाए गए हैं। इसलिए, सरकार केवल एलाइजा टेस्ट ही कराएगी। अस्पतालों में भी डेंगू से निपटने के लिए पूरे प्रबंध किए गए हैं। 

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