विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष के रूप में प्रीतम सिंह ने ग्रहण किया कार्यभार, बोले- चुनाव में उनका चेहरा भी बुरा नहीं

विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष के रूप में सोमवार को प्रीतम सिंह ने कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा के शेष गिने-चुने सत्रों में भी सरकार को घेरने का मौका कांग्रेस नहीं छोड़ेगी। 2022 में कांग्रेस वापसी करने जा रही है।

Sumit KumarMon, 26 Jul 2021 05:10 PM (IST)
प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने सोमवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पदभार संभाला।

राज्य ब्यूरो, देहरादून: विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष के रूप में सोमवार को प्रीतम सिंह ने कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा के शेष गिने-चुने सत्रों में भी सरकार को घेरने का मौका कांग्रेस नहीं छोड़ेगी। 2022 में कांग्रेस वापसी करने जा रही है। चुनाव में पार्टी के चेहरे के सवाल पर उन्होंने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडऩे का पार्टी का रुख दोहराया। उन्होंने चुटकी ली कि चुनाव में चेहरे की ही बात है तो उनका और उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा का चेहरा भी बुरा नहीं है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद बीती 13 जून को डा इंदिरा हृदयेश के आकस्मिक निधन की वजह से रिक्त हो गया था। कांग्रेस हाईकमान ने प्रीतम सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की जगह कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी है। प्रीतम सिंह ने सोमवार सुबह 11 बजे विधानसभा पहुंच कर नया पदभार ग्रहण किया। इस मौके पर मौजूद उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा, विधायक व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन आदेश चौहान, राजकुमार, ममता राकेश व मनोज रावत ने प्रीतम सिंह का मिष्ठान्न खिलाकर स्वागत किया। प्रीतम सिंह ने दिवंगत नेता इंदिरा हृदयेश का भावपूर्ण स्मरण करते हुए उनसे मिले सहयोग को भी याद किया।

बाद में विधानसभा स्थित सभागार में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश की जनता से किए वायदे पूरे नहीं किए। बेरोजगार आहत हैं। पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने जीना मुहाल कर दिया है। पेट्रोल कीमत के मामले में सेंचुरी लगा चुका है, जबकि डीजल सेंचुरी लगाने के करीब है। प्रधानमंत्री के मन की बात सुनकर जनता आजिज आ चुकी है। उन्होंने किसानों का ऋण माफ नहीं करने और तीन कृषि कानून को लेकर भी हमला बोला। केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर काबिज व्यक्तियों ने तीन मुख्यमंत्री देकर उत्तराखंड को प्रयोगशाला बना दिया है।

कोई नाराजगी नहीं, सब एकजुट

नई भूमिका में प्रीतम सिंह ने कहा कि उनकी नाराजगी की बात पूरी तरह गलत है। पार्टी में सभी एकजुट हैं। 28 जुलाई को प्रदेश प्रभारी की ओर से बुलाई गई नई गठित समितियों की बैठक के बारे में उन्हें सूचना नहीं दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रभारी की ओर से संशोधित चिट्ठी जारी की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि मंगलवार को नए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल होने के अगले दिन बुधवार को उनका जौनसार-बावर और हनोल मंदिर जाने का कार्यक्रम पहले से ही तय है।

इस कुर्सी पर करन को होना चाहिए

विधानसभा चुनाव में चेहरे को लेकर पार्टी के भीतर चल रही लड़ाई पर उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को चुनाव में चेहरा बताए जाने पर उन्होंने कहा कि चेहरा तो उनका भी बुरा नहीं है। करन माहरा का चेहरा भी अच्छा है। प्रीतम सिंह ने कहा कि आज वह नेता प्रतिपक्ष की जिस कुर्सी पर बैठे हैं, वहां उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा को होना चाहिए था। प्रीतम के पदभार ग्रहण करने के मौके पर तीन विधायक हरीश धामी, गोविंद सिंह कुंजवाल और फुरकान अहमद दिखाई नहीं दिए। प्रदेश संगठन के उनके करीबी कई चेहरे इस अवसर मौजूद रहे।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

प्रीतम सिंह ने नया पदभार ग्रहण करने के बाद शहीद स्थल जाकर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं विजय दिवस के मौके पर गांधी पार्क में कारगिल शहीद स्मारक पर पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत व प्रो जीतराम, पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, पार्टी कोषाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा, महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा, पूर्व प्रदेश सचिव गिरीश पुनेड़ा, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष संजय किशोर समेत कई पदाधिकारी व विधायक मौजूद थे। शाम को प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष तिलकराज बेहड़ ने भी उनके मुलाकात की।

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ये मुलाकात निर्णायक साबित हुई। तमाम स्तर पर लिए गए फीडबैक के बाद हाईकमान ने प्रदेश संगठन में भी बड़े बदलाव पर मुहर लगा दी थी। पार्टी नेतृत्व ने इस बदलाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के नाते प्रीतम सिंह को सूचित कर दिया था। हालांकि देर शाम कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने नई नियुक्तियों के संबंध में पार्टी हाईकमान का आदेश जारी कर दिया था।

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