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गुटबाजी की भेंट चढ़ी प्रदेश कांग्रेस संगठन की एकजुटता की मुहिम

देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए बुलाई गई तीन दिनी बैठक गुटबाजी की भेंट चढ़ गई। तीसरे और अंतिम दिन बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत नहीं पहुंचे। उनके आवास पर उनके समर्थक विधायकों व पूर्व विधायकों की बैठक से पार्टी की अंदरूनी सियासत गर्मा गई। इन विधायकों ने प्रदेश मुख्यालय से दूरी बनाए रखी।

मिशन 2022 को लेकर प्रदेश कांग्रेस संगठन की तैयारी पर अंदरूनी कलह हावी रही। केंद्र व प्रदेश की सत्ता में मजबूती से पांव जमाकर बैठी भाजपा से मिल रही कड़ी चुनौती से निपटने के लिए जिन मंसूबों को बांधकर प्रदेश कांग्रेस संगठन की तीन दिनी बैठक हुई, लेकिन एकजुटता की कोशिशों पर दिग्गजों का अहम भारी पड़ा। बीते दो दिनों में प्रदेश उपाध्यक्षों और प्रदेश महामंत्रियों की बैठक में सभी दिग्गजों और उनके समर्थकों ने एकदूसरे को निशाने पर लेने से गुरेज नहीं किया। बीते रोज महामंत्रियों की बैठक में आरोप-प्रत्यारोप तेज होने का असर गुरुवार को नजर आया। 

तीसरे दिन कांग्रेस भवन में फ्रंटल संगठनों व आनुषंगिक संगठनों की बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दूरी बनाई। हालांकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय व नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश में बीते रोज नोकझोंक होने के बावजूद दोनों नेता गुरुवार को बैठक में पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के आवास पर गुरुवार को उनके समर्थक विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, हरीश धामी, उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा, पूर्व विधायकों में मनोज तिवारी, हेमेश खर्कवाल व ललित फस्र्वाण बैठक हुई। इस बैठक के बाद पार्टी के गुटीय खींचतान और तेज होने के संकेत हैं। 

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हरीश रावत के संवाद में जुड़े भाजपा के दो विधायक

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने गुरुवार को वर्चुअल संवाद किया। उन्होंने इसमें कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल के साथ ही भाजपा नेताओं को भी आमंत्रित किया था। इस संवाद में भाजपा विधायकों सुरेंद्र सिंह जीना व महेश नेगी ने भी शिरकत की। भाजपा विधायकों के शिरकत करने से सियासी माहौल गर्माया रहा। हालांकि इस संवाद के जरिये पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुझाव मांगे थे। इन सुझावों को लेकर उक्त नेताओं के बीच आपस में चर्चा भी हुई। 

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