परिवार को सौंपा दूसरे व्यक्ति का शव, अंतिम संस्कार के समय चला पता; अस्पताल प्रशासन ने मांगी माफी

एक निजी अस्पताल ने संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके स्वजनों को किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया।

देहरादून के एक निजी अस्पताल ने संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके स्वजनों को किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया। इसका पता परिवार को तब चला जब अंतिम संस्कार की क्रियाएं की जाने लगीं। अस्पताल प्रशासन ने अपनी चूक स्वीकार की और सही शव को स्वजनों को सौंपा।

Sunil NegiFri, 16 Apr 2021 10:45 PM (IST)

जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद शव कोविड प्रोटोकॉल के तहत पैक कर स्वजनों को सौंपा जाता है। लिहाजा, ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। दून का एक निजी अस्पताल इसमें चूक कर गया और संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके स्वजनों को किसी अन्य व्यक्ति का शव सौंप दिया। इसका पता परिवार को तब चला, जब अंतिम संस्कार की क्रियाएं की जाने लगीं। अन्य व्यक्ति का शव देखकर स्वजन हक्के-बक्के रह गए और जिला प्रशासन से इसकी शिकायत की। खैर, अस्पताल प्रशासन ने अपनी चूक स्वीकार की और सही शव को स्वजनों के हवाले किया।

देहरादून निवासी अधिवक्ता संजय संख्यधर के भाई संजीव की बुधवार को कोराना से मौत हो गई थी। वह करीब एक पखवाड़े तक कैलाश अस्पताल में भर्ती रहे। संजय ने बताया कि उनके भाई और भाभी में कोरोना की पुष्टि हुई थी। शुरुआती चरण में भाई का स्वास्थ्य सामान्य था। बाद में तबीयत बिगड़ती गई और उन्हें आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। उनका आरोप है कि अस्पताल में श्वास रोग विशेषज्ञ भी नहीं है।

उन्होंने अस्पताल प्रशासन से अनुरोध करते हुए खुद बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाने की बात कही, पर अस्पताल प्रशासन ने इन्कार कर दिया। इस सबके बीच संजीव ने दम तोड़ दिया। मृतक के पुत्र प्रत्युष ने बताया कि उन्हें शव पैक करके दिया गया था। यह कहकर चेहरा नहीं दिखाया गया कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत इसे बार-बार नहीं खोला जा सकता। श्मशान घाट में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने पर पता चला कि शव बदल दिया गया है। 

इस पर उन्होंने अस्पताल में फोन कर स्टाफ से स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया। तब स्टाफ ने शवगृह में रखे एक अन्य शव की फोटो उन्हें भेजी। यह शव उनके पिता का था। काफी जतन के बाद अस्पताल से एक एंबुलेंस में शव श्मशान घाट भेजा गया। गलत शव को वापस ले जाया गया। बताया कि अस्पताल प्रशासन ने इसके लिए माफी भी मांगी है। 

इधर, अस्पताल के निदेशक पवन शर्मा ने बताया कि मरीज के उपचार में किसी तरह की कमी नहीं की गई। वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जगदीश रावत की देखरेख में उपचार किया गया। शव बदल जाना मानवीय भूल थी। इसके लिए मैं खुद श्मशान घाट गया और खेद जताया। 

यह भी पढ़ें-Uttarakhand Coronavirus Update: उत्तराखंड में स्थिति भयावह, शुक्रवार को सामने आए कोरोना के 2402 नए मामले

Uttarakhand Flood Disaster: चमोली हादसे से संबंधित सभी सामग्री पढ़ने के लिए क्लिक करें

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.