कर्ज के बदले सरकार का परिवहन निगम परिसंपत्तियों पर अधिकार, करीब 700 करोड़ की हैं परिसंपत्तियां

उत्तराखंड सरकार ने परिवहन निगम को ऋण देने के बदले उसकी परिसंपत्तियों को अपने अधिकार में ले लिया है। निगम की परिसंपत्तियां की कीमत तकरीबन 700 करोड़ रुपये है। सरकार निगम के गठन के बाद उसे ऋण के रूप में तकरीबन 350 करोड़ रुपये दे चुकी है।

Raksha PanthriWed, 04 Aug 2021 07:31 AM (IST)
कर्ज के बदले परिवहन सरकार का निगम परिसंपत्तियों पर अधिकार।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने परिवहन निगम को ऋण देने के बदले उसकी परिसंपत्तियों को अपने अधिकार में ले लिया है। निगम की परिसंपत्तियां की कीमत तकरीबन 700 करोड़ रुपये है। सरकार निगम के गठन के बाद उसे ऋण के रूप में तकरीबन 350 करोड़ रुपये दे चुकी है। परिवहन निगम पर कोरोना काल भारी पड़ रहा है। बीते वर्ष मार्च माह में लगे लाकडाउन के बाद परिवहन निगम की बसों का संचालन बिल्कुल बंद हो गया था। स्थिति यह है कि निगम के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में परिवहन निगम ने सरकार से अपने पुराने देयक देने का अनुरोध किया। जब सरकार ने देयकों का भुगतान कर दिया तब भी कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिल पाया।

निगम कर्मचारियों को वेतन भुगतान को लेकर आ रही दिक्कतों को देखते हुए कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट की शरण ली। जिस पर हाईकोर्ट ने सरकार को परिवहन निगम कर्मियों को वेतन जारी करने को कहा। इस कड़ी में हाल ही में सरकार ने निगम को 34 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। मंगलवार को 34 करोड़ रुपये की एक और किस्त जारी की है। इस तरह बीते एक वर्ष में राज्य सरकार परिवहन निगम को तकरीबन 190 करोड़ रुपये दे चुकी है। इसमें देयक व ऋण दोनों शामिल हैं।

इस बार सरकार ने परिवहन निगम को 34 करोड़ रुपये सशर्त जारी किए हैं। सचिव परिवहन डा रंजीत कुमार सिन्हा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि यह राशि परिवहन निगम को कार्मिकों के वेतन भुगतान के लिए ऋण के रूप में दी जा रही है। यह राशि इस शर्त के साथ दी जा रही है कि राज्य सरकार का परिवहन निगम की परिसंपत्तियों पर अधिकार होगा। इसके साथ ही आदेश में निगम की आय के संसाधनों में वृद्धि किए जाने एवं प्रतिपूर्ति दावों को प्रमाणित एवं पारदर्शी बनाने की कार्ययोजना बनाने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया है।

यह भी कहा गया है कि ऋण वापसी की अवधि और ब्याज की दर तथा अन्य शर्तें अलग से निर्धारित की जाएंगी। 700 करोड़ से अधिक की हैं परिवहन निगम की परिसंपत्तियां प्रदेश में परिवहन निगम की परिसंपत्तियां 75 स्थानों पर हैं। जिनका सरकारी मूल्य तकरीबन 700 करोड़ है। बाजार भाव इससे कहीं अधिक है। सरकार पहले भी विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए निगम की परिसंपत्तियों को लेने का प्रयास कर चुकी है लेकिन कर्मचारी संगठनों के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया।

कर्मचारी संगठन इसके एवज में सरकार से बाजार भाव देने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में पूर्व में कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन इन पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।उत्तराखंड परिवहन निगम संयुक्त मोर्चा के संयोजक अशोक चौधरी का कहना है कि सरकार यदि परिवहन निगम की परिसंपत्तियों पर अधिकार चाहती है तो फिर वह निगम का राजकीयकरण कर दे। इससे निगम की परिसंपत्तियां स्वयं ही सरकार की हो जाएंगी।

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